राहुल गांधी ने इस बहाने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी संकेत दिया कि वह किसी भी हाल में राजनीतिक अभियानों से कदम पीछे खींचने वाले नहीं हैं। न तो उनके उत्साह में कमी आई है और न ही वह सत्तारूढ़ दल को कठघरे में खड़ा करने से पीछे हटेंगे।
मायावती के सचिवालय में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के एक बयान को कई बार सुना गया? बसपा प्रमुख के निकटतम लोगों में एक रणनीतिकार राहुल गांधी द्वारा दिल्ली के जवाहर भवन से 9 अप्रैल को किए गए हमले से हैरान हैं। अवसर था के.राजू की किताब-दि दलित ट्रुथ के लोकार्पण का। राहुल गांधी ने बसपा प्रमुख मायावती पर कांग्रेस के साथ उ.प्र. विधानसभा चुनाव 2022 में तालमेल को लेकर हमला ही नहीं बोला, बल्कि एक तीर से कई निशाने साध दिए। राहुल ने इशारों-इशारों में बता दिया कि मायावती ने उ.प्र. विस चुनाव में खुलकर भाजपा का साथ दिया। इस बहाने उन्होंने कांग्रेस महासचिव और बहन प्रियंका गांधी वाड्रा का भी बचाव किया, क्योंकि उ.प्र. विस चुनाव का पूरा दारोमदार प्रियंका गांधी के ही कंधों पर था और इस बार कांग्रेस ने उ.प्र. में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है। राहुल गांधी ने इस बहाने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी संकेत दिया कि वह किसी भी हाल में राजनीतिक अभियानों से कदम पीछे खींचने वाले नहीं हैं। न तो उनके उत्साह में कमी आई है और न ही वह सत्तारूढ़ दल को कठघरे में खड़ा करने से पीछे हटेंगे। इसी बहाने राहुल गांधी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के जख्म पर भी थोड़ा मरहम लगा दिया है।
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जब अमित शाह पर चले संजय के तीर
आम आदमी पार्टी में समाजवादी सोच के राज्यसभा सांसद हैं संजय सिंह। बेबाक, लच्छेदार और उन्मुक्त भाषण के लिए ज्यादा जाने जाते हैं। संजय सिंह ने अपने इसी अंदाज से एक बार फिर आम आदमी पार्टी के संयोजक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मन मोह लिया। आम आदमी पार्टी के कई नेता भी संजय सिंह की तारीफ करते नहीं थके। वैसे भी राज्यसभा मेंं दिया गया यह संबोधन भी कुछ ऐसा था कि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भी बगलें झांकनी पड़ी। वह बस असहाय सी मुद्रा में सदन में बैठे, नजरें नीची किए मुस्कराते रहे। अवसर था दिल्ली के तीनों निगमों के एकीकरण से संबंधित विधेयक पर चर्चा का। इस दौरान सत्ता पक्ष ने आम आदमी पार्टी पर खूब जहर बुझे तीर छोड़े थे। अमित शाह ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन जब बारी संजय सिंह की आई तो उन्होंने सूद समेत मूलधन वापस करके हिसाब ही बराबर कर दिया। न केवल 2014 से 2021-22 तक भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा निगमों को आवंटित बजट का ब्यौरा देकर दूध का दूध और पानी का पानी किया, बल्कि चुनावों में जमानत जब्त होने का भी पूरा चिट्ठा खोलने लगे। कह भी दिया कि सत्ता पक्ष दिल्ली नगर निगमों में हार देखकर डर गया। अब भला जब संजय सिंह ऐसे तलवार भाजेंगे तो केजरीवाल का खुश होना तो लाजिमी है।
शरद पवार फेंट आए राजनीति के पत्ते
एनसीपी के प्रमुख शरद पवार महाराष्ट्र के ही नहीं देश की राष्ट्रीय राजनीति के धाकड़ नेता हैं। पिछले दिनों उन्होंने प्रधानमंत्री से भेंट की। बाहर आकर बताया कि शिवसेना नेता संजय राउत के परिजनों के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही पर प्रधानमंत्री से चिंता जताकर आए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में अगली सरकार महाविकास अघाड़ी की बनने की भविष्यवाणी की है। प्रेस के सामने एक बयान और दिया कि उनकी इच्छा यूपीए का अध्यक्ष बनने की नहीं है। शरद पवार के तीनों बयानों ने राजनीति के अंदरखाने में हलचल मचा रखी है। खुद संजय राउत मानते हैं कि पवार साहब की राजनीति को समझने में एकाध जनम और लेने पड़ सकते हैं। वैसे यह सही है कि पवार संजय राउत और बाला साहब ठाकरे परिवार से स्नेह रखते हैं। महाराष्ट्र में अगली सरकार को लेकर राजनीति के पंडित अभी से कुछ नहीं कह पा रहे हैं। क्योंकि एनसीपी के अंदरखाने में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की टीम ने थोड़ी घुसपैठ की है। अजित पवार पार्टी के भीतर चुपचाप अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं। शरद पवार के सबकुछ ध्यान में है। शरद पवार अपनी चाल चल रहे हैं। मुख्य मुद्दा तीसरा है। आखिर शरद पवार ने यूपीए का अध्यक्ष बनने की मंशा का बयान क्यों दिया? क्या उनके पास कोई ऐसा ऑफर है? लेकिन उनके इस बयान से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ी राहत मिलने की खबर है। कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे भी इसका मतलब निकालने में व्यस्त हैं।
सोनिया गांधी की तस्वीर ने चौंकाया, इतनी अनदेखी भी ठीक नहीं
लोकसभा स्पीकर, पीएम मोदी, राजनाथ सिंह व सोनिया गांधी
- फोटो : पीटीआई
प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर केन्द्रीय सचिवालय के अच्छे-अच्छे अधिकारी हैरान रह गए। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तस्वीर खूब वायरल हुई। जितना वायरल हुई उतनी ही चर्चा। मजे की बात यह केन्द्रीय सचिवालय के सचिव स्तर के अफसरों ने भी शिष्टाचार और अभिवादन के मामले में सोनिया गांधी की तारीफ की। शास्त्री भवन में एक मंत्रालय के अफसर ने कहा कि वह जब निदेशक थे तब पहली बार सोनिया गांधी को सामने से देखा था। यूपीए की सरकार थी। मैं कह सकता हूं कि उन्हें शिष्टाचार और मर्यादा निभानी आती है। दरअसल, मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के संसद भवन स्थित कार्यालय का है। संसद सत्र के अनिश्चितकालीन समय तक के लिए स्थगित होने के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रमुखों के साथ बैठक बुलाई थी। वहां लोकसभा अध्यक्ष के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद थे। तभी सोनिया गांधी कमरे में दाखिल हुईं। कोविड प्रोटोकॉल के तहत मास्क लगाए हुए। सभी नेताओं को अभिवादन किया, कुछ समय रुकीं और फिर लौट आईं। इस तस्वीर में दिखाई दे रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष और रक्षा मंत्री सोनिया का मर्यादापूर्ण अभिवादन स्वीकार कर रहे हैं और प्रधानमंत्री मानो उनकी पूरी तरह से अनदेखी कर रहे हैं। केन्द्रीय सचिवालय के कुछ अधिकारियों का मानना है कि इतनी अनदेखी भी ठीक नहीं है।
इम्तहान में पास हुए गिरिराज सिंह
गिरिराज सिंह को फरमान भेजा गया था कि वह पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री हैं तो कुछ प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में पत्रकारों को भी बताएं। अच्छा हो कि वह भाजपा मुख्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित करें। अभी तक केन्द्रीय मंत्री की पहचान जरा संप्रदायिक मुद्दों पर हवा देने, विपक्ष के नेताओं की चुटकी लेने या विवादित बोल तक सीमित थी। लेकिन फरमान था तो अनुपालना भी जरूरी था। लिहाजा गिरिराज सिंह ने पूरी तैयारी की। मंत्रालय के अफसरों को आंकड़े और प्रजेंटेशन में लगाया। एक एडिशनल सेक्रेटरी ने प्रजेंटेशन से पहले अधिकारियों के साथ बैठक की और फिर सभी ने गिरिराज सिंह को पूरी जानकारी दी। करीबी बताते हैं कि पूरे होमवर्क के बाद भी गिरिराज ऊपर वाले से खैर मना रहे थे कि कहीं कुछ विषय से भटक न जाएं। कुछ पत्रकार भी गिरिराज के मुंहलगे हैं। कुछ न कुछ निकलवा लेते हैं और हंगामा हो जाता है। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। गिरिराज ने प्रेस वार्ता में कई बार ताकीद की कि सवाल-जवाब भी केवल विषय पर ही होंगे। कहते हैं अंत भला तो सब भला। मंत्री ने न केवल अपने सरकार की उपलब्धियां गिनाई, बल्कि पास भी हो गए। माना जा रहा है कि अब वह धीरे-धीरे मीडिया में भी अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाने के लिए आगे आएंगे। कहने का आशय यह कि अभी तक मीडिया में बयान देने पर जो अघोषित प्रतिबंध लगा था, वह धीरे-धीरे हट सकता है।
भाजपा की बड़ी चुनौतियां और तीन प्रमुख चेहरे
भाजपा अपने राजनीतिक जीवन की ऐतिहासिक ऊंचाई पर चल रही है। पार्टी के नेता अब इसके शिखर की तरफ बढ़ने की रणनीति बना रहे हैं। हालांकि 2022-23 और 24 तक चार बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। पहली बड़ी चुनौती राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति के चुनाव के साथ गुजरात विधानसभा चुनाव की है। गुजरात में भाजपा लंबे समय से लगातार सत्ता में बनी हुई है। आम आदमी पार्टी ने गुजरात में दबाव बढ़ाया है और कांग्रेस जोरदार टक्कर देने की तैयारी कर रही है। गुजरात के बाद कर्नाटक विधानसभा का चुनाव होना है। जहां अंदरुनी घमासान लगातार बढ़ रहा है। टीम बीएस येदियुरप्पा भी बहुत खुश नहीं चल रही है। सरकार विरोधी लहर बढ़ रही है और काट के लिए भाजपा ने अभी से सांप्रदायिक हवा देनी शुरू कर दी है। राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपनी हैसियत से समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं और म.प्र. में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सबसे अंत में अपनी चाल चलते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और शाह लगातार पार्टी में वरिष्ठ हो रहे नेताओं से सरकार और संगठन का बोझ हल्का करते चल रहे हैं। बताते हैं जुलाई-अगस्त तक फिर बड़े पैमाने पर कुछ वरिष्ठों को विश्राम देने की योजना है। इसके साथ-साथ अब पार्टी में तीन बड़े नेता हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उ.प्र. विधानसभा चुनाव को जीतकर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। भाजपा को अंदर से समझने वाले कहते हैं कि अब इनमें संतुलन ही सबसे बड़ी चुनौती है। वैसे भी टीम योगी के लोग तो उन्हें अब भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखने लगे हैं।