कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद जो कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। सभी पांचों राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष होते इस्तीफा मांग लिया गया है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि नैतिकता के आधार पर तो वैसे ही सभी प्रदेश अध्यक्षों को इस्तीफा 10 तारीख के बाद ही सौंप देना चाहिए था। लेकिन गोवा के प्रदेश अध्यक्ष के सिवा किसी और नेता ने इस्तीफे की पेशकश तक नहीं की थी। कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जिस तरीके से आलाकमान ने पार्टी अध्यक्षों से इस्तीफा मांगा है उससे अंदाजा यहीं लगाया जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में पार्टी के बड़े बड़े विकेट चटकने वाले हैं।
दरअसल, पार्टी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में सबसे पहले पार्टी नेतृत्व पर फैसला लेना चाह रही थी। सर्वसम्मति से तय हुआ कि केंद्रीय नेतृत्व के शीर्ष पर बैठे नेताओं में पार्टी और पार्टी के पदाधिकारियों की आस्था है तो गाज प्रदेश स्तर के नेताओं पर गिरनी तय मानी जा रही थी। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि इसमें गाज गिरने जैसा कुछ भी नहीं है। जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तक चुनाव हार गए। जिनके ऊपर प्रदेश में कांग्रेस को आगे बढ़ाकर सरकार बनाने का दारोमदार था। नैतिकता के आधार पर इन सभी प्रदेश अध्यक्षों को चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे पहले इस्तीफे की पेशकश करनी ही चाहिए थी। अब अगर ऐसे में पार्टी अपने हिसाब से परिवर्तन ना करें तो उसके लिए भी आने वाले दिनों में मुसीबत ही होगी।
प्रियंका गांधी ने जिस तरीके से कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि सिर्फ दो तीन नेताओं के सिवा कोई भी नेता चुनाव प्रचार करने तक नहीं आया। कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी की यह नाराजगी कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को शंटिंग में डाल सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में कांग्रेस के ऐसे कई बड़े नेता साइड लाइन हो सकते हैं या उनका इस्तीफा हो सकता है जिनके ऊपर उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी जाकर चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन लोगों ने उसका निर्वहन नहीं किया।
प्रियंका गांधी ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के दौरान इस बात का जिक्र किया था कि उत्तर प्रदेश में चुनाव के दौरान उनके कई नेता चुनाव प्रचार करने ही नहीं आए। कांग्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि प्रियंका गांधी कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव है और उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी थी। ऐसे में उनकी नाराजगी जायज भी है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का अब तक का सबसे बुरा प्रदर्शन 2022 के विधानसभा चुनावों में हुआ है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी की नाराजगी का खामियाजा उन लोगों को निश्चित तौर पर भुगतना होगा, जो जिम्मेदारी के साथ एक विशेष अभियान में लगाए गए थे, लेकिन उन लोगों ने जमकर लापरवाहियां की।
सूत्र बताते हैं कि जिस तरीके से पंजाब में जातिगत समीकरणों को साधते हुए सबसे बेहतरीन समीकरण बिठाए गए थे, लेकिन अंदरूनी राजनीति के चलते सत्ता हाथ से गवानी पड़ी है उससे भी पार्टी खासी नाराज है। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस का आलाकमान इस बात से नाराज है कि सब कुछ जानते हुए भी चुनाव से पहले चीजें दुरुस्त नहीं की गई। अनुमान लगाया जा रहा है कि सिर्फ पंजाब प्रदेश कांग्रेस में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गोवा और मणिपुर में भी कांग्रेस का बड़ा फेरबदल संभव है। इसके अलावा और भी कई इस्तीफे आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं।