प्रियंका गांधी ने 15 मार्च को दिल्ली में यूपी के प्रदेश पदाधिकारियों के साथ चार घंटे की एक मैराथन बैठक की। इस बैठक में यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, मोहसिना किदवई, प्रियंका गांधी के विशेष राजनीतिक सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णम, अजय कपूर, अजय राय, प्रमोद तिवारी और इमरान प्रतापगढ़ी जैसे लोग शामिल थे। प्रियंका गांधी ने यूपी चुनाव परिणामों पर बहुत खुलकर चर्चा की। उन्होंने एक-एक नेता से यह जानने की कोशिश की कि पार्टी की यूपी में हार क्यों हुई और इसको मजबूत करने के लिए क्या किया जाना चाहिए।
बैठक में शामिल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कार्यकर्ताओं में चुनाव परिणाम को लेकर कुछ निराशा थी, लेकिन प्रियंका गांधी पूरी मीटिंग के दौरान एक बार भी परेशान या हतोत्साहित नजर नहीं आईं। उन्होंने सबको अपनी बात कहने का पूरा-पूरा अवसर दिया और पार्टी के उत्थान के लिए क्या किया जाना चाहिए, इसको लेकर उनकी बात सुनी।
इसलिए हारे यूपी चुनाव
कांग्रेस नेताओं की राय थी कि भाजपा ने मतदाताओं को धार्मिक आधार पर बहुत ज्यादा बांट दिया है, इस कारण दूसरा वर्ग भी भाजपा को किसी भी कीमत पर सत्ता से हटाने के लिए एक मजबूत विकल्प की बात कर रहा था। मतदाताओं को लगा कि इस स्थिति में केवल समाजवादी पार्टी ही भाजपा को सत्ता से बेदखल कर सकती है, इसलिए उसके वोटर खिसक कर सपा के पास चले गए। इस कारण पार्टी का बेसिक जनाधार बुरी तरह छिन गया।
मजबूत इरादों के साथ उतरेगी
कांग्रेस नेता आचार्य कृष्णम ने अमर उजाला से कहा कि पार्टी यह जानती है कि समाज के सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण के कारण उसका यह प्रदर्शन हुआ है, लेकिन इसके बाद भी वह सत्ता के लिए कोई शॉर्टकट नहीं अपनाएगी। वह सर्वधर्म समभाव वाली भावना को आगे रखते हुए अपने सिद्धांतों के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।
पार्टी को उम्मीद है कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति बहुत ज्यादा देर तक मतदाताओं को बांधकर नहीं रख सकती और इसका दौर जल्दी ही खत्म हो जाएगा। लंबी दूरी की राजनीति को ध्यान में रखते हुए पार्टी महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के सिद्धांतों पर चलते हुए लोगों की सेवा करने को ही अपनी राजनीति का आधार बनाएगी।