फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी के चुनावों में क्या है मुसलमानों का मिजाज, क्या हैं हालात, जानिए?

Sat, 28 Jan 2017 02:02 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : gettyर
विज्ञापन
देश के सबसे बड़े राजनीतिक गढ़ उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में सभी पार्टियों की निगाहें मुस्लिमों पर टिकी हैं। पिछली दो सरकार बनवाने में मुस्लिमों का खास योगदान रहा है, 2007 में मायावती ने दलितों और ब्राह्मणों के साथ मुस्लिमों पर दांव लगाया तो पहली बार बहुमत से उनकी सरकार सत्ता में आई।
विज्ञापन


इसी फार्मूले को 2012 में मुलायम सिंह ने आजमाया और यादव मुस्लिम यानि माय समीकरण के साथ चुनावी मैदान में उतरे और पहली बार सपा ने भी बहुमत से यूपी में अपनी सरकार बनाई। दो बार के आजमाए फार्मूले के बाद अब हर पार्टी की निगाह प्रदेश की इस 19 फीसदी आबादी और एकमुश्त रहने वाले वोटबैंक पर टिक गई है। आइए आपको आंकडों में बताते हैं यूपी में मुसलमानों और पार्टियों का आपसी गणित।

यूपी में मुस्लिम आबादी
यूपी में मुस्लिमों की आबादी 19 फीसदी से ज्यादा है। इनमें से 32 फीसदी शहरी इलाके में और 16 फीसदी ग्रामीण इलाके में निवास करते हैं। 

कुल आबादीः 3.8 करोड़
पुरुषः 2 करोड़
महिलाएंः 1.8 करोड़
विज्ञापन

पार्टियों में मुस्लिमों की स्थिति

सपा और कांग्रेस
दोनों पार्टियों की मुस्लिमों में अच्छी पैंठ है खासकर सुन्नी और उच्च वर्ग के मुसलमानों में। जिसमें खान, पठान, शेख, सैयद और सिद्दीकी प्रमुख हैं। दोनों ही पार्टियों के प्रमुख मुस्लिम नेता सुन्नी समुदाय से ही आते हैं। वहीं मुस्लिमों में अन्य तबके से आने वाले अंसारी और घोसी बिरादरी का समर्थन समाजवादी पार्टी को ही है। 

बहुजन समाज पार्टी
बसपा की पैंठ पसमांदा समाज में ज्यादा है। पार्टी ने दलित मुस्लिम वर्ग पर अपना दांव लगाया है। फारसी में पसमांदा का अर्थ है वो जो पीछे रह गए। अब वो बसपा में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। इसके अलावा मुस्लिमों के अन्य पिछड़े वर्ग कुंजरा, शेख, मंसूरी और भुर्जी का समर्थन मायावती के नेतृत्व वाली बसपा को है। 

भारतीय जनता पार्टी
आमतौर पर भाजपा का फोकस कभी मुसलमानों पर नहीं रहा है। लेकिन लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से प्रभावित होकर काफी संख्या में मुसलमान भाजपा से जुड़े। खासकर शिया मुसलमानों में भाजपा की अच्छी पैंठ है। भाजपा के दो बड़े मुस्लिम नेता मुख्तार अब्बास नकवी और सैयद शाहनवाज हुसैन भी शिया समुदाय से आते हैं। ऐसे में भाजपा का फोकस भी शिया मुसलमानों पर ही है जिन्हें सुन्नियों के मुकाबले ज्यादा उदार माना जाता है। 

मुस्लिम उम्‍मीदवार
प्रदेश में मुस्लिम उम्‍मीदवारों के मामले में फिलहाल बसपा सबसे आगे चल रही है जिसने कुल 97 मुस्लिम उम्‍मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। इसके बाद अगला नंबर सपा का है जिसने फिलहाल घोषित कुल 208 उम्‍मीदवारों में से 56 टिकट मुस्लिमों को दिए हैं। वहीं भाजपा ने अभी तक 304 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर ‌दिए हैं, लेकिन इनमें से किसी मुस्लिम उम्‍मीदवार को टिकट नहीं दिया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें