उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को है। इसके ठीक एक सप्ताह पहले गुरुवार को किसानों ने उत्तर प्रदेश चुनाव में एंट्री ले ली। दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों से भाजपा को 'सजा' देने की अपील की। किसानों का आरोप है कि भाजपा ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किया गया अपना वादा नहीं निभाया है। उसने लखीमपुर खीरी हिंसा के आरोपी मंत्री पर भी कोई कार्रवाई नहीं की है, लिहाजा उसे सजा दी जानी चाहिए। किसानों को यह नहीं बताया गया है कि वे भाजपा को 'सजा' कैसे दें, लेकिन इसका आशय भाजपा के खिलाफ मतदान करने को जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, भाजपा ने दावा किया है कि केंद्र-राज्य की किसान हितैषी नीतियों के कारण यूपी सहित पूरे देश का किसान उसके साथ है, और इस तरह की अपील का कोई असर नहीं होगा।
दरअसल, 2013 में मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगे हो गए थे। इसके बाद हुए ध्रुवीकरण का सीधा लाभ भाजपा को हुआ था और 2014, 2017 और 2019 के चुनावों में उसे इस क्षेत्र में एकतरफा बढ़त मिली थी। लेकिन किसानी का मुद्दा इस सांप्रदायिकता को तोड़ने में बड़ा कारगर साबित हुआ है। चूंकि, हिंदू और मुसलमान दोनों ही इस क्षेत्र में प्रमुख रूप से किसानी पर ही निर्भर करते हैं, इस आंदोलन ने एक बार फिर उन्हें सरकार के खिलाफ साथ ला दिया है। भाजपा को इसका नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
भाजपा नेता मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में पार्टी की हार का कारण किसानों की अपील नहीं था। वहां पूरे विपक्ष का लामबंद हो जाना, बंगाल अस्मिता का पार्टी द्वारा उचित जवाब न दे पाना और ममता बनर्जी की तुलना में पार्टी का कोई बड़ा सर्वमान्य नेता न होना पार्टी की हार का बड़ा कारण बना था। लेकिन चूंकि यूपी में योगी आदित्यनाथ जैसा मजबूत चेहरा उनके पास मौजूद है, और सरकार के पास गिनाने के लिए बड़े-बड़े कामों की फेहरिस्त के साथ सुरक्षा का बड़ा मुद्दा भी है, नेताओं का मानना है कि यूपी में किसान नेताओं की अपील का कोई बड़ा असर नहीं होगा।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहजाद पूनावाला ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार ने देश के किसानों के लिए एतिहासिक कार्य किए हैं। बजट 2022-23 में न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में फसलों की कीमत चुकाने के लिए 2.37 लाख करोड़ रुपये का धन आवंटित किया गया है। यह राशि हमारे देश के किसानों को सीधे उनके खाते में ट्रांसफर करके दी जाएगी।
शाहजाद पूनावाला ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की रिकॉर्ड फसल खरीदी की है। हमारा कृषि निर्यात दो गुना से अधिक हो गया है। इसका सीधा लाभ हमारे किसान भाइयों को ही हो रहा है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि किसानों के नाम पर हो रही राजनीति सफल नहीं होगी क्योंकि किसान अपना हित देखते हुए भाजपा के साथ हैं।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की आय का सबसे बड़ा केंद्र है। बसपा-सपा आज किसानों की हितैषी होने का दावा कर रही हैं, जबकि इन्हीं की सरकार में रिकॉर्ड 31 चीनी मिलों को बंद करने का फैसला हुआ था। जबकि कोरोना काल का संकट होने के बाद भी योगी आदित्यनाथ सरकार में किसी चीनी मिल को बंद नहीं होने दिया गया, उलटे रिकॉर्ड गन्ना पेराई कर चीनी उत्पादन किया गया और किसानों को पूरा भुगतान किया गया। उन्होंने कहा कि किसान इस कथनी-करनी के फर्क को समझ रहे हैं और यही कारण है कि वे भाजपा के साथ खड़े हैं।
उत्तर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद हुई पहली बैठक से ही किसान हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता रहे हैं। योगी सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में ही किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का बकाया माफ करने का बड़ा फैसला लिया। इसके अलावा गन्ने का बकाया माफ करने और वर्तमान सत्र का बड़ा हिस्सा तत्काल किसानों को पहुंचाने का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि किसान उसके साथ खड़े हुए हैं।