उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। 2014 के बाद हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां जीत का चौका लगाया है। उत्तर प्रदेश में 41.3 फीसदी प्रतिशत वोट शेयर के साथ भाजपा की यह लगातार चौथी जीत है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पार्टी आज भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। देखना दिलचस्प है कि इस ताकत को बढ़ाने में महिलाओं की क्या भूमिका रही है?
महिलाओं के वोट किधर गए?
माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत के पीछे महिला मतदाताओं की बड़ी भूमिका रही है। पिछले कुछ चुनावों में भले महिलाएं मतदान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं और कांग्रेस ने 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देने का दांव चला, लेकिन इस चुनाव में उसका रुझान भाजपा की तरफ दिखा।
इंडिया टुडे और एक्सिस माइ इंडिया के एक्जिट पोल के मुताबिक सपा के मुकाबले भाजपा को 16 फीसदी महिलाओं ने अधिक वोट किया है।
चुनाव के बाद लोकनीति-सीएसडीए और एक अखबार ने अपने सर्वेक्षण में यह पाया है कि भाजपा को महिला मतदाताओं ने सपा गठबंधन से 13 फीसदी ज्यादा वोट दिया है। वहीं पुरुष मतदाताओं ने सपा गठबंधन के मुकाबले भाजपा को पांच फीसदी ज्यादा वोट दिया है।
अध्ययन के मुताबिक 18-25 वर्ष की आयु की 15 फीसदी महिलाओं और 56 फीसदी और उससे अधिक आयु की 18 फीसदी महिलाओं ने भाजपा को वोट दिया। इस चुनाव में महिलाओं का मतदान पुरुष मतदान से अधिक हो गया है।
उत्तर प्रदेश चुनाव सातवां चरण: वाराणसी में मतदान के लिए कतार में महिलाएं
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उत्तर प्रदेश में सातवें चरण के साथ पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए आज मतदान का समापन हो गया।
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी
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इस चुनाव में कितनी महिला उम्मीदवार?
प्रियंका गांधी के महिला उम्मीदवारों को 40 फीसदी टिकट देने का कोई नतीजा नहीं निकला और उनकी केवल एक महिला उम्मीदवार आराधना मिश्रा मोना ही जीत दर्ज कर सकीं। लेकिन उनकी इस कवायद का नतीजा यह रहा कि बीते विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार महिला उम्मीदवारों की संख्या में चार प्रतिशत का इजाफा हुआ।
2017 के विधानसभा चुनाव में कुल उम्मीदवारों में से केवल नौ प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को टिकट मिला था। यूपी इलेक्शन वॉच और असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में 445 महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ रही थीं। जबकि इस बार 560 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं।
चुनाव में सबसे ज्यादा कांग्रेस ने 159, भाजपा ने 45, सपा ने 42 और बसपा ने 37 महिला उम्मीदवार उतारे थे।
कितनी महिलाएं जीतीं
इस बार 44 महिला प्रत्याशियों को जीत मिली है। जबकि पिछली पर चुनाव में 41 महिला प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। यानी इस बार महिला विधायकों की संख्या ज्यादा नहीं बढ़ी है।
पिछले चुनाव में 41 महिलाओं की जीत प्रदेश की विधानसभा में महिला भागीदारी का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा, जो तकरीबन 10 फीसदी था। 2012 में यानी 16वीं विधानसभा में 35 महिलाएं विधायक चुनकर आई थीं।
जीतने वाली उम्मीदवारों में से 25 भाजपा से, 14 सपा से, दो अपना दल से और एक कांग्रेस से है।