बाराबंकी पूरब की तरफ बढ़ रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का गेट है। इसके आगे जैसे-जैसे चुनाव बढ़ेगा, जातिवाद की हवा थोड़ा कसकर चलने के आसार हैं। भाजपा ने जातिवाद से चुनाव को बाहर निकालने के लिए हर दांव चलना शुरू कर दिया है। 23 फरवरी को अवध क्षेत्र में चौथे चरण के मतदान के बाद अगले तीन चरण बड़े निर्णायक होने वाले हैं। 23 फरवरी को नौ जिलों की 60 सीटों पर मतदान होना है। इनमें पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, फतेहपुर और बांदा हैं। पांचवे चरण में भी 11 जिलों की 60 सीटों पर 27 फरवरी को मतदान होगा। इनमें श्रावस्ती, बहराइच, बाराबंकी, गोंडा, अयोध्या, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, चित्रकूट शामिल हैं। कहा जा सकता है कि 2017 के चुनाव में यह भाजपा का गढ़ था। इसके पहले के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा अन्य के मुकाबले इन जिलों में ठीक-ठीक प्रदर्शन कर लेती थी।
जाटलैंड, रूहेलखंड, यादवों के गढ़ के बाद अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सभी जातियों, वर्गों, संप्रदायों की प्रभावी भागीदारी की तरफ बढ़ रहा है। तीसरे चरण से लेकर चौथे, पांचवें, छठे और सातवें चरण में ब्राह्मण, क्षत्रिय, कायस्थ, वैश्य, कोईरी, कुर्मी, पटेल, प्रजापति, निषाद, पासी सभी की भूमिका बढ़ती चली जाएगी। यहीं अयोध्या के मुद्दे पर विधानसभा चुनाव के जाने या न जाने की भी अग्नि परीक्षा हो जाएगी। भाजपा के नेताओं को जहां इन चरणों में पहले के दो चरणों में हुए कुछ नुकसान की भरपाई की उम्मीद है, वहीं समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि सपना देखने का सबको हक है। मुख्य बात यह है कि जनता भाजपा से नाराज है।
उत्तर प्रदेश के एक आईएएस अफसर चुनाव में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। वह अवध क्षेत्र से ही आते हैं। उनका कहना है कि अवध में इस बार जातिवादी आधार प्रभावी रहने की उम्मीद है। वरिष्ठ पत्रकार श्याम नारायण पांडे कहते हैं कि 2017 में क्या अगड़ा, क्या पिछड़ा और क्या दलित, सब भाजपा के साथ थे। लेकिन इस बार जाति का मुद्दा हावी है। सुल्तानपुर के सुनील सिंह कहते हैं कि यदि ब्राह्मण और वैश्य ने साथ दे दिया तो भाजपा क्षेत्र में 2017 को दोहराएगी।
तीनों चरणों की 179 सीटों में भाजपा ने 149 सीटें और अपना दल (एस) ने दो सीटें जीती थीं। इस तरह से तीसरे, चौथे, पांचवे चरण ने 2019 में भाजपा के प्रचंड बहुमत की गाथा लिख दी थी। समाजवादी पार्टी के लिए सीटों का गुणागणित करने वाले सूत्र का कहना है कि रायबरेली की दो सीटें कांग्रेस जीत सकती है। तीन चरणों में कांग्रेस के खाते में पांच-छह सीटें मिलने की उम्मीद है। बसपा के भी कुछ उम्मीदवार बड़ी मजबूती से लड़ रहे हैं। ऐसे में भाजपा को 2022 में 79 सीटें मिल जाए तो बड़ी बात होगी। वह कहते हैं कि इन तीन चरणों की भाजपा अगर 60 फीसदी सीटें जीत ले तब भी वह 403 सीटों में से बहुमत के लिए जरूरी 202 सीटों से काफी दूर रहेगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए आधा दर्जन चुनाव सर्वेक्षण एजेंसियां कड़ी मशक्कत कर रही हैं। सैकड़ों प्रतिनिधि इसके लिए गांव से लेकर शहरों में मतदाताओं को टटोल रहे हैं। एक बड़ी कंपनी के सीनियर अधिकारी ने कहा कि अभी हमें नहीं बोलना चाहिए। सात मार्च को सातवें चरण का मतदान होने के बाद सर्वे और मतदान के बाद का अनुमान सार्वजनिक होगा। हम अभी केवल इतना कह सकते हैं कि नतीजे इस बार फिर और काफी चौंकाएंगे। बताते हैं कि 2022 के चुनाव की जब समीक्षा होगी तो कई सरकार बनाने का दावा करने वाले सभी दलों का एक बड़ा भ्रम टूटेगा। जिस दल की अभी बहुत कम गिनती हो रही है, वह भी चौंका सकता है।