कहने को तो समाजवादी पार्टी ने अपना चुनावी घोषणा पत्र अभी जारी नहीं किया है। लेकिन एक-एक करके सपा मुखिया अखिलेश यादव कुछ ऐसी घोषणाएं जरूर करते जा रहे हैं, जो उनके घोषणा पत्र का अहम हिस्सा हैं। इन्हीं घोषणाओं की कड़ी में गुरुवार को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की पेंशन बहाली की घोषणा करके प्रदेश के तकरीबन आठ से दस लाख कर्मचारियों और उनके परिवार से सीधा जुड़ने की अहम कोशिश की। प्रदेश के चुनावी माहौल में राजनीतिक गलियारों में चर्चा यही है कि क्या अखिलेश यादव 300 यूनिट निशुल्क बिजली और कर्मचारियों के पेंशन बहाली का मास्टर स्ट्रोक खेल गए हैं।
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक पार्टियां हमेशा से कर्मचारियों को खास तवज्जो देती आईं हैं। उसकी सबसे प्रमुख वजह यही है कि प्रदेश में तकरीबन 80 लाख कर्मचारी अलग-अलग संगठनों से जुड़ा हुआ है और उनकी अपनी तमाम समस्याएं रही हैं। प्रदेश के इन्हीं संगठनों के महासंघ के अध्यक्ष रहे और वर्तमान में समाजवादी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि पेंशन बहाली के लिए उनका संगठन हमेशा से सरकार पर दबाव बनाता रहा है। वे कहते हैं कि 2005 के बाद से नई पेंशन प्रणाली व्यवस्था से कर्मचारियों का कोई हित नहीं सध रहा है। ऐसी कमरतोड़ महंगाई में कर्मचारियों का भविष्य रिटायर होने के बाद सुरक्षित रहे इसलिए 2005 से पहले वाली पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू ही होनी चाहिए। श्रीवास्तव कहते हैं कि अगर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल हो गई तो प्रदेश का तकरीबन आठ से दस लाख कर्मचारी और उससे जुड़े सभी परिवार के सदस्यों का सीधे तौर पर भविष्य सुरक्षित हो जाएगा। वे कहते हैं कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की घोषणा करने से प्रदेश में लाखों आंदोलनरत कर्मचारियों की आस्था पार्टी में बढ़ेगी। इससे न सिर्फ पार्टी मजबूत होगी, बल्कि सत्ता में वापसी करके कर्मचारियों के हितों के लिए भी आगे काम करेंगे।
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक जानकार चंद्रशेखर शर्मा कहते हैं कि किसी भी प्रदेश में कोई भी राजनीतिक पार्टी कर्मचारियों के हितों को अनदेखा नहीं कर सकती है। वह कहते हैं कि बात अगर सिर्फ उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों की करें तो उसमें पेंशन बहाली एक बड़ा मुद्दा बीते कुछ समय से रहा है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल इस कोशिश में लगे रहते हैं कि कर्मचारियों की समस्या का समाधान उनके द्वारा हो जाए ताकि आने वाले विधानसभा के चुनावों में वोट की मजबूती भी बनी रहे। समाजवादी पार्टी की ओर से एक बड़ी संख्या के कर्मचारी समुदाय को पुरानी पेंशन बहाली की राहत देने जैसी घोषणा करके अखिलेश ने निश्चित तौर पर राजनीतिक निशाना तो लगाया ही है। वे कहते हैं उत्तर प्रदेश की राजधानी से लेकर अलग-अलग जिलों और तहसीलों पर शिक्षकों से लेकर अन्य महकमों में काम करने वाले कर्मचारी अपनी पेंशन को लेकर मांग करते आए हैं। ऐसे में यह एक बड़ी घोषणा तो मानी जा सकती है लेकिन इसका असर कितना होगा यह तो चुनावों के परिणाम ही बताएंगे।