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UP Congress: उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने राहुल गांधी को दिखाया ठेंगा, ब्रजभूषण सिंह के करीबी को बनाया जिलाध्यक्ष

सार

दरअसल, यूपी कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति से पहले प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और पार्टी महासचिव अविनाश पांडेय ने लखनऊ कार्यालय में बैठकर उम्मीदवारों से बाकायदा साक्षात्कार लिया था। उम्मीदवारों से उनके क्षेत्र में कांग्रेस को बढ़ाने की उनकी कोशिश और संभावनाओं के बारे में विस्तृत बातचीत की गई थी।
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राहुल गांधी - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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राहुल गांधी ने गुजरात की अपनी यात्रा के दौरान यह बयान दिया था कि कांग्रेस में कई लोग भाजपा के समर्थक हैं। ऐसे लोगों को पार्टी से बाहर किया जाएगा तभी पार्टी ठीक तरीके से चल पाएगी। लेकिन लगता है कि राहुल गांधी का यह मंत्र उनकी अपनी ही पार्टी के नेता नहीं समझ सके हैं। यही कारण है कि भाजपा के एक करीबी नेता को गोंडा का जिलाध्यक्ष बना दिया गया है।  यूपी कांग्रेस की आई जिलाध्यक्षों की सूची में कई नामों पर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के इस फैसले से नाराज कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं तो कुछ ऐसे नेताओं के खिलाफ दिल्ली तक शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं।

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कांग्रेस ने दो दिन पहले ही यूपी के लिए सभी जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। इसमें गोंडा से राम प्रताप सिंह को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। लेकिन वे न केवल भाजपा के टिकट पर विधायक चुने जा चुके हैं, बल्कि पिछले चुनाव में भी भाजपा के टिकट पर ही चुनाव लड़ना चाहते थे। भाजपा के वर्तमान विधायक का टिकट न कटने के कारण राम प्रताप सिंह को भाजपा का टिकट नहीं मिल पाया जिससे नाराज होकर वे वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 

बृजभूषण सिंह के करीबी हैं राम प्रताप सिंह
दरअसल, राम प्रताप सिंह को बृजभूषण शरण सिंह का करीबी माना जाता है। बीते फरवरी महीने में ही 10 तारीख को राम प्रताप सिंह ने अपने पिता के सम्मान में एक बड़ा कार्यक्रम किया था जिसमें उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह को मुख्य अतिथि बनाया था। बृजभूषण शरण सिंह ने मंच से खुला ऐलान किया था कि वे हर स्थिति में राम प्रताप सिंह के साथ हैं और आगे भी रहेंगे। भाजपा के एक दिग्गज नेता के करीबी को कांग्रेस के इतने महत्त्वपूर्ण पद पर बैठाने को कांग्रेस के कार्यकर्ता शंका की नजर से देख रहे हैं।    
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चर्चा है कि बृजभूषण शरण सिंह ने पिछले विधानसभा चुनाव में भी राम प्रताप सिंह को भाजपा से टिकट दिलाने की कोशिश की थी। लेकिन प्रदेश के शीर्ष भाजपा नेताओं से तालमेल न होने के कारण राम प्रताप सिंह को टिकट नहीं मिल पाया। इसके बाद वे बागी हो गए और कांग्रेस में शामिल हो गए।  

'फिर पाला बदल सकते हैं राम प्रताप सिंह'
कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने अमर उजाला को बताया कि पार्टी इन जिलाध्यक्षों की नियुक्ति 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कर रही है। लेकिन यह सभी जानते हैं कि राम प्रताप सिंह भाजपा के कार्यकर्ता-नेता थे। टिकट न मिलने के बाद ही वे कांग्रेस में आए हैं। इस बात की पूरी आशंका है कि राम प्रताप सिंह चुनाव के समय एक बार फिर भाजपा में शामिल हों और उसके टिकट पर चुनाव लड़ें। 

इस समय भी बृजभूषण शरण सिंह उनका पूरा साथ देने की बात कह रहे हैं। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि चुनाव में बृजभूषण उन्हें अपने कोटे से टिकट दिलाने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि ऐसे में पार्टी इतने महत्त्वपूर्ण पद पर किसी बाहरी के करीबी को कैसे बैठा सकती है। राम प्रताप सिंह ने जब फरवरी में अपने पिता के सम्मान में कार्यक्रम किया, तब मंच पर कांग्रेस का कोई नेता मौजूद नहीं था, जबकि मंच पर बैठे सभी लोग भाजपा के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में राम प्रताप सिंह की कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बीच स्वीकार्यता कैसे हो पाएगी और कार्यकर्ता उनके नेतृत्व में पार्टी के लिए कैसे काम कर पाएगा।

राम प्रताप सिंह के उस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इसके बाद कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने राम प्रताप सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कई कार्यकर्ताओं ने फेसबुक-एक्स पर राम प्रताप के खिलाफ बातें कही हैं। इससे पार्टी की किरकिरी हो रही है।

वरिष्ठ नेताओं ने कैसे किया नजरअंदाज?
दरअसल, यूपी कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति से पहले प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और पार्टी महासचिव अविनाश पांडेय ने लखनऊ कार्यालय में बैठकर उम्मीदवारों से बाकायदा साक्षात्कार लिया था। उम्मीदवारों से उनके क्षेत्र में कांग्रेस को बढ़ाने की उनकी कोशिश और संभावनाओं के बारे में विस्तृत बातचीत की गई थी। राष्ट्रीय सचिवों ने जिलों में भी जाकर कार्यकर्ताओं-उम्मीदवारों से जिलाध्यक्ष के लिए संभावित नेताओं पर राय-मशविरा किया था। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि राम प्रताप का बृज भूषण शरण सिंह से संबंध पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को न पता हो। लेकिन इसके बाद भी राम प्रताप सिंह को इतना महत्त्वपूर्ण पद दिया जाना कई लोगों को नहीं पच रहा है। 

पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा कि पार्टी ने कई जिलों में ऐसे लोगों को पदों पर बैठा दिया है जिन्होंने जिलाध्यक्ष के लिए आवेदन तक नहीं किया था। इसके बाद भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के आशीर्वाद के कारण कुछ लोगों को जिलाध्यक्ष बना दिया गया है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि राहुल गांधी ने जो संदेश दिया है, उसका क्या होगा? इस रणनीति के सहारे कांग्रेस यूपी में कैसे मजबूत होगी?

संगठन के मूल पद पर बाहरी को बैठाना सही नहीं: कांग्रेस नेता
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता और वर्तमान पीसीसी सदस्य वृजेंद्र सिंह ने अमर उजाला से कहा कि जिलाध्यक्ष पार्टी की विचारधारा से जुड़ा मूल पद होता है। इस पद पर उसी व्यक्ति को बैठाया जाता है जो पार्टी की विचारधारा से गहराई से जुड़ा हो, उसकी इसमें निष्ठा हो और वह पद पर रहने के दौरान पार्टी की विचारधारा और संगठन के प्रचार-प्रसार के लिए काम करे। लेकिन इस पद पर भाजपा से जुड़े लोगों को बैठाने से जनता के बीच गलत संदेश जाता है और पार्टी कार्यकर्ता भी ऐसे व्यक्ति के नेतृत्व में काम नहीं कर पाते। 

वृजेंद्र सिंह ने कहा कि बृजभूषण शरण सिंह लगातार राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां करते रहे हैं, ऐसे व्यक्ति के करीबी को जिलाध्यक्ष बनाकर जनता के बीच गलत संदेश दिया गया है। यही कारण है कि पार्टी के कई कार्यकर्ता राम प्रताप सिंह को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के खिलाफ लगातार अपनी बात रख रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए पार्टी को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

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