क्यों हुए नाराज?
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों पर तालमेल में यूपी में कांग्रेस को 80 में से 17 सीटें मिलीं। इनमें भदोही की सीट शामिल नहीं थी, जहां से राजेश मिश्रा चुनाव लड़ना चाहते हैं। दरअसल, 2004 के लोकसभा चुनाव में डॉ. राजेश कुमार मिश्रा ने कांग्रेस के टिकट पर वाराणसी से जीत हासिल की थी। लेकिन 2009 में वे इसी सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और चौथे स्थान पर रहे। इस चुनाव में भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने जीत हासिल की थी, जबकि बसपा उम्मीदवार मुख्तार अंसारी दूसरे और समाजवादी पार्टी के अजय राय तीसरे स्थान पर रहे थे।
इसके बाद अजय राय कांग्रेस में आ गए और 2014-2019 में कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने चुनाव लड़ा। इस बार भी माना जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से वही मोदी के सामने उम्मीदवार हो सकते हैं।
इस बीच, राजेश मिश्रा ने वाराणसी की बगल की सीट भदोही से अपनी चुनावी तैयारी शुरू कर दी थी। उन्हें उम्मीद थी कि ब्राह्मण-मुसलमान बहुल सीट भदोही से वे जीत हासिल कर सकते हैं। लेकिन समझौते में यह सीट सपा के पास चली गई। राजेश मिश्रा के करीबी मानते हैं कि राजेश मिश्रा की राजनीति को किनारे लगाने के लिए ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस सीट को सपा को दे दिया, इससे राजेश मिश्रा नाराज हो गए।
असली कहानी कुछ और
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला को बताया कि राजेश मिश्रा की नाराजगी का कारण कुछ और है। दरअसल, वाराणसी में अपने लिए कोई संभावना न होने के कारण वे भदोही से चुनाव लड़ना चाहते थे। उन पर आरोप है कि वे पहले से समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं और कांग्रेस से टिकट न मिलने की स्थिति में वे सपा की ओर से भदोही से चुनाव लड़ सकते हैं। अब जब भदोही सीट सपा के खाते में चली गई है, वे कांग्रेस नेताओं पर हमले कर अखिलेश यादव के प्रति अपना समर्पण दिखाना चाहते हैं।