रेलवे को रफ्तार देने के लिए मोदी कैबिनेट ने आधा दर्जन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें रेल लाइन का दोहरीकरण व विद्युतीकरण करना है।
को मोदी कैबिनेट ने सबसे बड़ा उपहार दिया है। इसके तहत झांसी-मानिकपुर और भीमसेन-खैरार रेल लाइन, भटनी-औंडिहार रेल लाइन का विद्युतीकरण व दोहरीकरण किया जाएगा। इसके अलावा बिहार में मुजफ्फरपुर-सुगौली व सुगौली वाल्मीकि नगर रेल लाइन का विद्युतीकरण व दोहरीकरण का काम होगा। कैबिनेट की बैठक में नक्सल प्रभावित ओडिशा के मलकानगिरी में पहला रेल प्रोजेक्ट भी शुरू करने का निर्णय लिया गया। कैबिनेट के इस निर्णय से न सिर्फ रेलवे ट्रैफिक बंटेगा बल्कि नई ट्रेनें चलाने में भी सुविधा होगी।
केंद्रीय रेल मंत्री
पीयूष गोयल ने कैबिनेट की बैठक के बाद बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को जोड़ना हमारी प्राथमिकता है। मलकानगिरी में पहला रेल प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश व ओडिशा में 11,661 करोड़ की लागत से 881 किलोमीटर रेल लाइन का कार्य होगा। भटनी-औड़िहार रेलवे लाइन के दोहरीकरण से मुगलसराय व इलाहाबाद के बीच रेल रूट पर कंजेशन खत्म होगा। वाराणसी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
झांसी- मानिकपुर और भीमसेन-खैरार लाइन का दोहरीकरण व विद्युतीकरण
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य 2022-2023 तक रखा गया है। करीब 4955.72 करोड़ रुपये की लागत से इस प्रोजेक्ट का काम पूरा किया जाएगा। 425 किलोमीटर लंबी इस लाइन के अनुरूप ट्रेन समय पर रहेंगी और सफर ज्यादा सुरक्षित होगा। झांसी-कानपुर, झांसी इलाहाबाद के बीच और भी बेहतर रेल यातायात का संचालन हो सकेगा। झांसी, महोबा, बांदा, चित्रकूट धाम और मध्य प्रदेश का छतरपुर जिला कवर होगा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से भीमसेन की कनेक्टिविटी होने से कृषि उत्पाद बाजार तक पहुंच सकेगा। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र खजुराहो पहुंचना भी आसान हो सकेगा। झांसी-सतना और कानपुर-सतना रूट पर चलने वाली ट्रेनों को गति मिलेगी।
भटनी-औंडिहार रेल लाइन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 116.95 किलोमीटर लंबी भटनी-औड़िहार लाइन के विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण परियोजना को 1300.9 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। 2021-22 तक इसे पूरा किया जाएगा। यह योजना उत्तर प्रदेश में देवरिया, बलिया, मऊ और गाजीपुर जिलों को कवर करेगी। औंड़िहार स्टेशन वाराणसी मंडल का जंक्शन स्टेशन है, जो औंडिहार-छपरा, औंडिहार-भटनी, औंडिहार-जौनपुर और औंडिहार-वाराणसी से चारों दिशाओं से जुड़ा हुआ है।
इलाहाबाद-नैनी-मुगलसराय रेल रूट पर भी कंजेशन खत्म होगा। मार्ग का दोहरीकरण होने से यातायात मुगलसराय-नैनी-इलाहाबाद मार्ग पर ट्रेन शिफ्ट हो जाएगा। इससे पूर्वी भारत विशेष रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र के यात्रियों को लाभ मिलेगा। वाराणसी से कनेक्टिविटी बढ़ेगी। तीर्थस्थान, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। ट्रेन तेज रफ्तार से चलेगी। मुगलसराय-नैनी-इलाहाबाद मार्ग रूट के यात्रियों को भी लाभ मिलेगा।