आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा क्षेत्र के उपचुनावों में समाजवादी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। ये लोकसभा क्षेत्र समाजवादी पार्टी के गढ़ के रूप में देखे जाते थे। मुसलमान मतदाताओं के एकमुश्त समर्थन के कारण आजमगढ़ सीट पर यादव परिवार का तो रामपुर सीट पर आजम खान का दबदबा रहता था। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड लहर में भी सपा ने इन दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन केवल ढाई साल में ही सपा को इन दोनों किलों में हार का सामना करना पड़ा है। क्या अखिलेश यादव को मुसलमानों की नाराजगी भारी पड़ी?
बसपा और प्रशासन ने हराया: सपा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह ने अमर उजाला से कहा कि मुसलमान मतदाता आज भी उनकी पार्टी के साथ खड़ा है। सपा उम्मीदवारों को मिले वोट इस बात का प्रमाण हैं कि उनका कोर वोटर आज भी उनके साथ है। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि आजमगढ़ में बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार के कारण मतों में विभाजन का उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। सपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि यूपी सरकार ने प्रशासन का दुरूपयोग किया और पहले वोटिंग के दौरान और बाद में मतगणना के दौरान गड़बड़ी की और जीत हासिल की।
भाजपा ने मतदाताओं का दिल जीता
उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता संजय चौधरी ने कहा कि आजमगढ़ और रामपुर को समाजवादी पार्टी का किला नहीं कहा जा सकता। इन दोनों सीटों पर पहले भी सपा की हार हुई है और भाजपा उम्मीदवारों को जीत मिली है। उन्होंने कहा कि केंद्र और यूपी की सरकारों के जनहितकारी कार्यों के कारण जनता में उनके प्रति विश्वास बढ़ा है और इसी का परिणाम हुआ है कि आज इन दोनों सीटों पर भी भाजपा को जीत मिली है।