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यूपी: जानें, 5वें चरण के समीकरण, किसमें कितना है दम

Mon, 27 Feb 2017 12:59 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पांचवें चरण में जिन इलाकों में चुनाव हो रहे हैं वो राजनीतिक दृष्टि से बेहद उपजाऊ माना जाता है।  11 जिले बलरामपुर, गोंडा, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, बहराइच, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, अमेठी और सुल्तानपुर की 51 सीटों पर वोटिंग हो रहे हैं। असल में ये वो इलाका है, जहां जातीय लिहाज से तो अलपसंख्यक, दलित व पिछड़ा फैक्टर काफी प्रभावी है। लेकिन सवर्ण जातियों का दबदबा भी किसी-किसी इलाके में कम नहीं है। 
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अंबेडकरनगर जिले की सीटों की बात करें तो कटेहरी में ब्राह्मण मतों की संख्या अधिक है। टांडा में सपा और बसपा में मुस्लिम मतों को लेकर खींचतान चल रही है। जलालपुर में ब्राह्मण व मुस्लिम मतदाताओं में सेंध लगाने में प्रत्याशी लगे हुए हैं। वहीं जिले की अकबरपुर सीट पर कुर्मी वोटरों की संख्या अधिक होने के कारण प्रत्याशियों के पसीने छूट रहे हैं।

श्रावस्ती जिले में दो विधानसभा सीटें हैं। श्रावस्ती सीट पर ब्राह्मण वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। दूसरे स्थान पर अल्पसंख्यक समुदाय के वोटर हैं। तीसरे स्थान पर अनुसूचित जाति के वोटर हैं। वहीं जिले के दूसरी विधानसभा भिनगा में सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक वोटर हैं। दूसरे नंबर पर पिछड़ा वर्ग व तीसरे स्थान पर ब्राह्मण हैं। यहां जीत की गणित ब्राह्मण वोटरों के रुझान पर टिका है। 
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गोंडा जिले में ब्राह्माण व मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है।  वहीं जिले में कुर्मी की संख्या भी अच्छी-खासी है।
 

पिछली बार 51 में से 36 सीटें सपा जीती थीं

मतदान के लिए लगी लंबी लाइन - फोटो : amar ujala
इन इलाकों में सीधी-सपाट गणित न होने के कारण भविष्यवाणी करना काफी मुश्किल है। जातीय ध्रुवीकरण की गणित और सियासी समीकरणों को बनाने व बिगाड़ने की दिलचस्पी यहां ज्यादा दिखती है।  इस इलाके में पिछड़ों को कई उपजातियां हैं, जो अलग-अलग हिस्सों में प्रभावी संख्या में मौजूद हैं।

इनमें कुर्मी, लोध, कुशवाहा, मौर्य, राजभर, निषाद, बिंद, कश्यप, केवट, सैथवार, बढ़ई, नाई, लोहार, नोनिया चौहान जैसी 80 से ज्यादा जातियां शामिल हैं। इसके अलावा खटिक, वाल्मीकि, बकसोर व धोबी जैसी दलित जातियां प्रभावी संख्या में हैं। 

सपा की सरकार बनाने में इन सीटों का महत्व कितना अधिक था, इसे सिर्फ नतीजों से ही समझा जा सकता है। वर्ष 2012 में इन 51 सीटों में 36 सीटें सपा ने जीती थीं। भाजपा और कांग्रेस को पांच-पांच सीटें मिली थीं, जबकि बसपा को तीन और पीस पार्टी को दो सीटें हासिल हुई थीं। श्रावस्ती, बलरामपुर, सुल्तानपुर और अंबेडकरनगर में सपा प्रत्याशियों ने हर सीट पर जीत दर्ज की थी। 
 
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लोकसभा चुनाव के समीकरण दोहराने में बीजेपी

- फोटो : अमर उजाला
वहीं कई जिले मुस्लिम आबादी प्रभावित है।  बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, अम्बेडकर नगर, सुल्तानपुर,  कबीर नगर, श्रावस्ती, गोंडा, फैजाबाद जैसे जिलों में 20 से 30 प्रतिशत तक मुस्लिम आबादी है।

भाजपा की कोशिश लोकसभा चुनाव के समीकरण दोहराने की है तो सपा का प्रयास कॉंग्रेस के साथ गठबंधन की ताकत से आंकड़ा सुधारने का दिखाई दे रहा है। विधानसभा के 2007 के चुनाव में इनमें कई सीटें जीत चुकी बसपा भी समीकरणों को दुरुस्त करके प्रदर्शन सुधारने की उम्मीद के साथ जुटी दिखाई दे रही है।

कुल 51 सीटों पर 1.84 करोड़ मतदाता हैं। जिसमें पुरुष मतदाता-0.99 करोड़, महिला मतदाताओं की संख्या 0.85 करोड़ है।
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