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नेतृत्व पर सवाल: राहुल गांधी की राह में अड़ंगा डालेंगे नतीजे, प्रियंका गांधी में कांग्रेस का भविष्य देखने वालों को लगा झटका

Fri, 11 Mar 2022 06:15 AM IST
Jeet Kumar अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली।

सार

राहुल गांधी को अगर अध्यक्ष बना भी दिया जाए तो उनकी सबसे पहली और कठिन परीक्षा गुजरात में होगी, जहां साल के अंत में चुनाव होने हैं।
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राहुल गांधी। (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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पांच राज्यों के नतीजों के बाद असंतुष्ट खेमे से कांग्रेस में स्थाई अध्यक्ष की मांग फिर जोर पकड़ेगी। हालांकि पार्टी सितंबर तक चुनाव कराने की घोषणा कर चुकी है लेकिन चुनावी नतीजे राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने की राह में अड़ंगा डालेंगे। राहुल समर्थक नेता उनके कमान संभालने के इंतजार में हैं। वहीं, एक खेमा प्रियंका गांधी वाड्रा में भविष्य देख रहा था मगर उन्हें भी नतीजों ने निराश किया है।

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नतीजों के बाद असंतुष्ट नेताओं की बयानबाजी और सक्रियता बढ़नी तय है। कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने और कुछ को किनारे करने के बाद जिस जी-23 में खामोशी दिख रही थी उसमें अब कुछ नए सदस्यों के नाम भी जुड़ सकते हैं। ऐसे में नतीजों ने नेतृत्व के सामने खुद को साबित करने की चुनौती बढ़ा दी है। राहुल गांधी को अगर अध्यक्ष बना भी दिया जाए तो उनकी सबसे पहली और कठिन परीक्षा गुजरात में होगी, जहां साल के अंत में चुनाव होने हैं।

नए अध्यक्ष के सामने एक और चुनौती पंजाब है, जहां आप के हाथों गंवाई जमीन पर लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना होगा। दिल्ली में सत्ता गंवाने वाली कांग्रेस वहां आज तक वापसी नहीं कर पाई है। राहुल गांधी के सामने एक और चुनौती यूपी के अमेठी को लेकर भी होगी, जहां वह 2019 का चुनाव हारे हैं।
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महिलाओं पर चला दांव फेल
प्रियंका ने महिला मतदाताओं की ताकत को भांपते हुए एक अलग लाइन खींचकर राज्य की 40 फीसदी यानी 159 महिलाओं को टिकट दिया। पार्टी ने समाज की कुछ पीड़ित महिलाओं को आगे लाकर उम्मीदवार बनाया लेकिन ये प्रयोग भी सफल नहीं हुआ।

महिलाएं प्रियंका की ढाल नहीं बन सकीं। इसे देखते हुए कांग्रेस महासचिव के लिए अब पार्टी से अधिक खुद का भविष्य बचाने की चुनौती है।

पहले पर्दे के पीछे और अब बीते तीन साल से प्रियंका अपने भाई राहुल का सहारा बनकर लड़ती हुई दिखती रही हैं लेकिन यूपी ने जिस तरह कांग्रेस को नकारा है उससे लोकसभा चुनाव में कोई चमत्कार कर दिखाना बहुत मुश्किल है।

सबसे खराब प्रदर्शन: चुनाव प्रबंधन हवा-हवाई
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लगातार यूपी न छोड़ने की बात कह रही हैं लेकिन जिस उम्मीद और रणनीति के साथ उन्होंने चुनावी ताना-बाना बुना था उसे लोगों ने नकार दिया। प्रियंका चुनावी लिटमस टेस्ट में फेल साबित हुई हैं। प्रियंका पार्टी को उतनी सीट भी नहीं दिला सकीं जितनी पिछली विधानसभा में थीं। यूपी में यह कांग्रेस का अब तक सबसे खराब प्रदर्शन रहा है।

प्रियंका चुनाव में जोर-शोर से उतरीं और मेहनत भी की लेकिन सलाहकारों, रणनीतिकारों से घिरने के कारण चुनाव प्रबंधन हवा-हवाई रह गया। प्रियंका के इर्द-गिर्द जो चेहरे दिखाई दे रहे थे उनकी चमक भी कोई कमाल नहीं कर सकी।

  • बताते हैं कि सलाहकारों और पार्टी नेताओं के बीच तालमेल की कमी ने भी कांग्रेस की फजीहत कराई है।
  • प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में करीब 167 रैलियां और जनसभाएं की। करीब 42 जगहों पर रोड शो किए। राज्य की 403 में से 340 विधानसभाओं में वर्चुअल रैलियों के माध्यम से संपर्क किया।
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