अनचाही कॉल और स्पैम मैसेज अब आपको परेशान नहीं करेंगे। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ट्राई ने नए नियमों के तहत टेलीमार्केटिंग कंपनियों द्वारा कॉल या मैसेज भेजने से पहले उपभोक्ताओं की सहमति अनिवार्य कर दी है। ट्राई ने टेलीकॉम ऑपरेटरों से भी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कंपनियों का पंजीकरण भी सुनिश्चित करने को कहा है।
यानी अब सिर्फ पंजीकृत टेलीमार्केटिंग कंपनियां ही उपभोक्ताओं को इस तरह की कॉल, मैसेज कर सकती हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी-भरकम जुर्माना भी लग सकता है। उल्लंघन की श्रेणी के हिसाव से उन्हें 1000 रुपये से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।
ट्राई के बयान के मुताबिक, आज उपभोक्ताओं के लिए अनचाही कॉल व स्पैम सिरदर्दी बन गई है। इसे देखते हुए नए नियमों की अधिसूचना जारी करना अपरिहार्य हो गया था। नए नियमों में तय किया गया है कि किसी भी व्यावसायिक, टेलीमार्केटिंग या उसे सेवाएं देने वाली कंपनी को कॉल या संदेश भेजने से पहले उपभोक्ता से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। ट्राई ने इससे पहले 2010 में नियम जारी किए थे।
नियमों में कहा गया है कि उपभोक्ता के समक्ष कंपनी को कुछ समय के लिए ही मंजूरी देने का विकल्प रखा जाएगा। ट्राई अनचाही कॉल को रोकने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल करेगा। इसकी मदद से केवल अधिकृत लोगों को ही ग्राहकों का ब्योरा मिलेगा। यही नहीं, वह तभी मिलेगा जब उन्हें सेवा देने की जरूरत होगी। गौरतलब है कि देश में हर दिन 100 करोड़ के करीब अनचाहे कॉल और संदेश दूरसंचार ग्राहकों को भेजे जाते हैं।
नए नियमों में हुए ये बदलाव
नए नियमों के तहत भेजने वालों, हेडर्स (विभिन्न मैसेजेज को अलग करने वाली इकाइयों) और उपभोक्ताओं की सहमति का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। नया नियम उपभोक्ताओं को सहमति पर पूर्ण नियंत्रण देता है और पहले दी गई सहमति वापस लेने का भी उन्हें अधिकार देता है। उपभोक्ताओं की सहमति के पंजीकरण से मौजूदा नियमों का दुरुपयोग रुक सकता है।