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नीट प्रश्रपत्र क्षेत्रीय भाषा में अनुवाद पर राज्यों को देना होगा शपथपत्र

Fri, 20 Jul 2018 02:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाषाओं में अनुवाद सही हुआ है या नहीं, अब केंद्र सरकार राज्यों से शपथपत्र लेगी। वहीं परीक्षार्थी को परीक्षा देने के लिए अब अपने जिले से बाहर नहीं जाना होगा। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेडकर ने ये जानकारी राज्यसभा में एक प्रश्र के उत्तर में दी। केंद्रीय मंत्री ने ये भी जानकारी दी कि अब पीएचडी के रिसर्च पेपर को कॉपी या चोरी नहीं किया जा सकेगा इसके लिए तकनीक तैयार की जा रही है।  

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अपने ही अपने जिले में मिलेगा परीक्षा देने का मौका  

एआईडीएमके सांसद विजिला सत्यानंत के पिछले साल नीट परीक्षा में बैठे 24 हजार परीक्षार्थियों का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि नीट परीक्षा में राज्य से करीब 1,14,602 परिक्षार्थी बैठे थे जिसमें 24 हजार ने क्षेत्रीय तमिल भाषा में परीक्षा दी थी। चूंकि प्रश्रपत्र का अनुवाद करमें 49 प्रश्र गलत पूछे गए। लिहाजा इन परीक्षार्थियों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।  

प्रश्र के उत्तर में प्रकाश जावेड़कर ने सदन में बताया कि तमिलनाडू में पेपर में पूछे गए गलत सवालों का मामला कोर्ट में लंबित है। लिहाजा बहुत कुछ नहीं कहूंगा। उन्होंने बताया कि पिछले साल ट्रांसलेशन का ये मामला सामने आया था। पिछली बार हिंदी-अंग्रेजी का पेपर अलग था और दूसरी भाषाओं का अलग। इस बार एक ही पेपर था जिसे तमिल में भी ट्रांसलेट किया गया। 
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तमिलनाडू सरकार की ओर से ही ट्रांसलेटर उपलब्ध कराए गए थे। इस चूक को देखते हुए अब अगले साल परीक्षा के लिए राज्य सरकारों से शपथपत्र लेंगे कि ट्रांसलेशन सही हुआ या नहीं। पूरक प्रश्र के उत्तर में कहा कि परीक्षार्थियों को दूसरे राज्यें में जाकर परीक्षा देने और असुविधा पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आगे से परीक्षार्थी जिस राज्य और जिले का होगा उसकी परीक्षा उसी जिले में कराने की व्यवस्था की जाएगी। उपसभापति वैंकेया नायडू ने भी इस मामले में सरकार को तत्काल उचित कदम उठाने को कहा ताकि परीक्षार्थियों को दूसरे राज्यों में भटकना न पड़े।  

उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने माना अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में दो सौ में देश की एक संस्था ही शामिल है। गंभीर मुद्दा है और सरकार ने 2016 के बजट में इस बात की घोषणा की है कि दस निजी और दस सरकारी उच्च शिक्षण संस्थाओं को चयनित करके उसकी गुणवत्ता पर जोर देंगे। इसके लिए संस्थाओं को स्वायत्ता देंगे। उन्होंने इस बात इंकार किया कि देश की 700 शिक्षण संस्थाओं में फेक डिग्री मिल रही है और रिसर्च पेपर या जरनल कॉपी पेस्ट कर प्रकाशित किए जाते हैं। 

उन्होंने कहा कि अब इस तरह का साफ्टवेयर इस्तेमाल किया जाएगा जिससे पीएचडी का रिसर्च पेपर कहीं से कॉपी या चोरी का है पकड़ा जा सकेगा।  
प्रकाश जावेड़कर ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि प्रस्तावित जियो इंस्टीटयूट को ग्रीन फील्ड कैटेगरी में रखा गया है। सरकार ऐसे लोगों को बढ़ावा देना चाहती है जो गुणवत्तायुक्त उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पूंजी लगाना चाहते हैं। ग्रीन फील्ड कैटेगरी के तहत दस प्रस्ताव आए थे। सरकार ने अभी जियो को नामित किया है तीन साल कामकाज और विस्तार देखने के बाद सरकार उसे इंस्टी्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा देगी।  

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