बार-बार अवांछित फोन कॉल और मैसेज के जरिए ग्राहकों को परेशान करने वाली टेलीमार्केटिंग कंपनियों और विक्रेताओं के लिए अब ऐसा करना कठिन होगा। फिर भी यदि वे ऐसा करती पाई गई तो उन पर भयंकर जुर्माना लगेगा। सूत्रों के मुताबिक, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने फोन कॉल और मैसेज के जरिए ग्राहकों को परेशान करने वाली टेलीमार्केटिंग कंपनियों और विक्रेताओं पर जुर्माना लगाने के लिए परामर्श लेना शुरू किया है। सूत्रों ने बताया कि अवांछित कॉल करने में शामिल होने वाले कॉलर को भारी जुर्माना देना होगा। जुर्माने की राशि प्रति कॉल 100 रुपये तक जा सकती है। इसके अलावा खास बात यह है कि इन लोगों से जो जुर्माना वसूला जाएगा, वह सरकारी खजाने में नहीं जमा किया जाएगा, बल्कि उस व्यक्ति को दिया जाएगा जिसे फोन या करके या मैसेज करके परेशान किया गया होगा।
गौरतलब है कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अनचाहे कॉल या मैसेज को रोकने के लिए कड़े नियम बना रखे हैं। स्पष्ट मानदंडों के बावजूद, उपभोक्ताओं को अभी भी विक्रेताओं और टेलीमार्केटरों से बार-बार अनचाहे कॉल का सामना करना पड़ रहा है। ट्राई ने हजारों कनेक्शन काटे हैं, लेकिन इसका कोई नतीजा देखने को नहीं मिल रहा है। टेलीमार्केटिंग से जुड़े कई लोगों ने ग्राहकों को परेशान करने के लिए नए नए तरीके ईजाद कर लिए हैं और ऐसे लोगों को पकड़ना सरकार के बूते के बाहर की बात हो गई है। ट्राई के मुताबिक 27 सितंबर 2011 को टेलीकॉम कामर्शियल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रीफरेंस रेगुलेशन लागू होने के बाद ट्राई की कोशिश बेकार हो गई। हालांकि ट्राई ने डीएनडी (डू नॉट डिस्टर्ब) रजिस्ट्री से काफी हद तक कॉल और अवांछित एसएमएस की समस्या को नियंत्रित किया है।
इसके अलावा अभी हाल ही में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने होटल और रेस्त्रां द्वारा लगाए जाने वाले सेवा शुल्क पर रोक लगाई है।इसके अलावा मंत्रालय ने हाल ही में कुछ एड-टेक कंपनियों द्वारा संचालित और प्रचारित नकली समीक्षाओं पर भी शिकंजा कसा है।