उन्नाव गैंग रेप कांड में पॉक्सो एक्ट के तहत चल रहे मुकदमे की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से कहा है कि मुकदमे की सुनवाई विशेष अदालत सीबीआई लखनऊ में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया सरकार प्रारंभ करे। कोर्ट ने सीबीआई से जांच की प्रगति रिपोर्ट 30 मई को प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
इससे पूर्व उन्नाव कांड में चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस सुनीत कुमार की पीठ के समक्ष सीबीआई ने अब तक की गई जांच की रिपोर्ट प्रस्तुत की। एक अर्जी पीड़िता की मां की ओर से दाखिल कर कहा गया कि उसने पति की हिरासत में हुई मौत के मामले में जो तहरीर दी थी उस पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। जो मुकदमा दर्ज हुआ है उसकी प्राथमिकी में तथ्यों को तोड़ा मरोड़ा गया है।
यह मुकदमा सीबीआई ने दर्ज किया है। पीड़िता की मां की ओर से जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए। वहीं मामले में आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की ओर से भी हाईकोर्ट में अर्जी प्रस्तुत कर कहा गया कि पूरी कार्रवाई एकतरफा हो रही है। आरोपी का पक्ष नहीं सुना जा रहा है।
सीबीआई के वकील ने कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत उन्नाव की पॉक्सो अदालत में चल रहे मुकदमे की सुनवाई बहुत तेजी से हो रही है। यदि सीबीआई की जांच पूरी होने से पहले इस केस में कोई नतीजा आ गया तो जांच निरर्थक हो जाएगी। यह भी कहा गया कि विशेष सीबीआई अदालत को पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमे की सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है।
इस पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार से कहा कि वह एकमात्र इस मामले के लिए अधिसूचना जारी करे ताकि हाईकोर्ट सुनवाई की इजाजत सीबीआई अदालत को दे सके। इस मामले के न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल चतुर्वेदी ने भी सीबीआई की मांग का समर्थन किया है। पीड़िता की मां की ओर से अधिवक्ता डीआर चौधरी ने पक्ष रखा।