देश के वर्तमान माहौल के बीच समान नागरिक संहिता का मुद्दा भी गर्म हो सकता है। हरिद्वार में आयोजित विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में प्रस्ताव पास किया गया है कि देश के सामने मौजूद कई गंभीर चुनौतियों के स्थाई समाधान के लिए समान नागरिक संहिता लागू करना आवश्यक है। हालांकि, समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए कोई आंदोलन चलाने की बजाय विहिप ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर एक व्यापक जनसहमति बनाने की बात कही है, लेकिन विश्व हिंदू परिषद की सर्वोच्च संस्था में पारित यह प्रस्ताव इस अर्थ में बेहद महत्त्वपूर्ण है कि समान नागरिक संहिता पर जमीअत-उलमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संस्थाओं ने समान नागरिक संहिता का विरोध किया है।
निष्काम सेवा सदन, भूपतवाला, हरिद्वार में आयोजित दो दिवसीय बैठक में प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए पेजावर स्वामी श्रीमद जगद्गुरु माधवाचार्य स्वामी विश्वप्रपन्न तीर्थ ने की। बैठक में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कुटुम्ब प्रबोधन विषय पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि देश की अनेक समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए आवश्यक है कि जल्द से जल्द सभी वर्गों के लिए एक समान कानून लागू किया जाए। इससे विभिन्न सामाजिक परिवेशों में सामाजिक समीकरणों में अनापेक्षित बदलाव नहीं आएगा और विभिन्न सामाजिक समस्याएं नहीं उत्पन्न होंगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रस्ताव?
समान नागरिक संहिता पर सर्वोच्च अदालत में भी कई मामले विचाराधीन हैं। कई याचिकाओं के जरिए देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग की गई है। संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला देते हुए इसे लागू करने की मांग की जा रही है, जबकि केंद्र सरकार ने एक याचिका के जवाब में कहा है कि लॉ कमीशन इस मुद्दे पर विचार कर रहा है और उसकी रिपोर्ट के बाद इस पर कानून लाने पर विचार किया जाएगा, लेकिन अभी तक केंद्र के स्तर पर इस मुद्दे पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है, जबकि उत्तराखंड सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक कमेटी का गठन भी कर दिया है।
देश के अलग-अलग मुस्लिम संगठन इस मुद्दे पर अपना विरोध जता चुके हैं। चूंकि, समान नागरिक संहिता में सभी संप्रदायों के लिए एक समान विवाह, तलाक, गोद लेने की व्यवस्था लागू करने की बात कही जा रही है, लिहाजा कुछ वर्ग इसका विरोध कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस कानून के आने के बाद वे अपनी धार्मिक स्वतंत्रताओं के माध्यम से अपनी संस्कृति का पोषण नहीं कर सकेंगे।
हालांकि, कानून के जानकारों का कहना है कि समान नागरिक संहिता में विवाह, भरण-पोषण और तलाक के कानून इस समय ही सभी वर्गों के लिए एक समान हो चुके हैं और समान नागरिक संहिता का बड़ा हिस्सा पहले ही लागू किया जा चुका है। केवल पैतृक प्रॉपर्टी पर अधिकार और वसीयत जैसे कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं। इस पर भी कानून बन जाए तो समान नागरिक संहिता लागू किए बिना ही सभी वर्गों को एक कैटेगरी के नीचे लाया जा सकेगा।
कानूनविदों का मानना है कि जनजातीय समूहों में विवाह और तलाक को लेकर अपनी अलग मर्यादाएं हैं। उनके लिए कानून में भी विशेष संरक्षण देने की मांग की गई है। इसलिए कानून बनाते समय उनके अधिकारों और उनकी संस्कृति का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
अवैध धर्मांतरण का मुद्दा भी गरमाया
विहिप की इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के अलग-अलग राज्यों में चल रहे अवैध धर्मांतरण के बारे में भी चिंता व्यक्त की गई। संतों ने कहा है कि कुछ जगहों पर आदिवासी इलाकों में योजनाबद्ध तरीके से धर्मांतरण कराया जा रहा है। इसे कठोर लागू किए बिना रोकना मुश्किल है। संतों ने केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्यों की सरकारों से अवैध धर्मांतरण पर कठोर कानून बनाने की मांग की।
मंदिरों के अधिग्रहण पर नाराजगी
संतों ने इस बात पर गहरी नाराजगी प्रकट की कि आज भी देश में हिंदू समाज के मंदिरों पर सरकारों का कब्जा है, जबकि दूसरे धर्म के पूजा स्थलों पर कोई नियंत्रण नहीं है। संतों ने कहा है कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे को तत्काल संज्ञान में लेना चाहिए और सभी धर्मों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना चाहिए। संतों ने कहा है कि आवश्यकता पड़ी तो इसके लिए पूरे देश में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।