सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक समूह के नए प्रबंधन बोर्ड को उन तीन संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों (एआरसी) के साथ बातचीत की अनुमति दे दी, जिन्हें 8000 फ्लैटों के लिए बकाया राशि के एकमुश्त निपटारे का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं, शीर्ष अदालत ने यूनिटेक के प्रमोटरों चंद्रा बंधुओं को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार किया है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि कंपनी के नए प्रबंधन द्वारा गठित चार निदेशकों की उप-समिति सुरक्षा एआरसी, जेएम फाइनेंशियल एआरसी और एडलवाइस एआरसी के साथ बकाया और निपटान समझौते के बारे में बातचीत करेगी। पीठ ने चार हफ्ते में उसे वार्ता के नतीजे से अवगत कराने को कहा है।
शीर्ष अदालत ने उप-समिति को नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के साथ बातचीत करने की भी अनुमति दी है। अथॉरिटी ने यूनिटेक समूह द्वारा देय राशि और बकाया राशि के बारे में नए बोर्ड द्वारा प्रस्तुत समाधान योजना पर आपत्ति जताई थी।
अथॉरिटी का कहना था कि यूनिटेक को लीज पर दी गई जमीन के एवज में उसे राशि का भुगतान नहीं किया गया है। पीठ ने कहा कि इसी तरह की चर्चा उप-समिति द्वारा हरियाणा सरकार और उसकी एजेंसियों के साथ दावों और समझौते पर भी की जाएगी।
सुनवाई के दौरान नए बोर्ड की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने कहा कि अभी 74 आवासीय और 10 व्यावसायिक परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जिनमें लगभग 15,000 इकाइयों का कब्जा घर खरीदारों को दिया जाना है।
यूनिटेक को खरीदारों से मिल चुके हैं 14,270 करोड़
फॉरेंसिक ऑडिरों ने सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यूनिटेक लि. को 74 प्रोजेक्ट के लिए 29,800 खरीदारों से 2006 से 14 के बीच 14,270 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। वहीं वित्तीय संस्थानों से भी इन परियोजनाओं के निर्माण के लिए 1805 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।