केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के विकास को प्राथमिकता दी है। मोदी सरकार से पहले पूर्वोत्तर अशांति, बमबारी, बंद आदि के लिए जाना जाता था, लेकिन बीते आठ वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है। अव पूर्वोत्तर भारत के राज्य विकास की नई इबारत लिख रहे हैं।
बीते आठ सालों में पूर्वोत्तर के राज्यों में उग्रवाद से संबंधित हिंसा की घटनाओं में 74 फीसदी की कमी आई है। वहीं, सुरक्षा बलों पर हमलों के मामलों में 60 प्रतिशत और नागरिकों की मौत में 89 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। राजधानी दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डीओएनईआर) ने बताया कि लगभग 8,000 युवाओं मे उग्रवादी समूहों को छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। वे अब समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर अपने और अपने परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं।
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केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के विकास को प्राथमिकता दी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते आठ सालों के दौरान 50 से भी ज्यादा बार पूर्वोत्तर का दौरा किया है। वहीं, भाजपा के विभिन्न 74 मंत्रियों ने भी 400 से अधिक बार इस क्षेत्र का जायजा लिया है। उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार से पहले पूर्वोत्तर अशांति, बमबारी, बंद आदि के लिए जाना जाता था, लेकिन बीते आठ वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है। अब पूर्वोत्तर भारत के राज्य विकास की नई इबारत लिख रहे हैं।
विकास के पथ पर आगे बढ़ा पूर्वोत्तर
केंद्रीय मंत्री ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि मोदी सरकार के दौरान बीते तीन सालों में पूर्वोत्तर के विद्रोही संगठनों के साथ शांति समझौता भी किया गया है। साल 2019 में त्रिपुरा के नेशनल लिबरेशन फ्रंट जैसे विद्रोही संगठनों के साथ, 2020 में ब्रू समुदाय और बोडो से संबंधित समूहों और 2021 में कार्बी समुदाय के समूहों के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
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उन्होंने यह भी बताया कि असम-मेघालय और असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद भी लगभग सुलझा लिया गया है। शांति बहाली के साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास के पथ पर आगे बढ़ गया है।
पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए केंद्र ने खोला खजाना
जी किशन रेड्डी ने यह भी बताया कि पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए केंद्र सरकार ने बजट में बड़ी बढ़ोतरी की है। उन्होंने बताया कि साल 2014 में भाजपा की सरकार आने के बाद से इस क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन में भारी वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि बीते आठ सालों में इस क्षेत्र के लिए 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैं। केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के तहत पिछले चार वर्षों में वास्तविक व्यय 7,534.46 करोड़ रुपये था, जबकि 2025-26 तक अगले चार वर्षों में विकाय योजनाओं पर व्यय के लिए उपलब्ध धनराशि 19,482.20 करोड़ रुपये है।