नागरिकता संशोधन बिल पर असम सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में हो रहे विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह बिल केवल असम या पूर्वोत्तर राज्यों के लिए नहीं है।
राज्यसभा में बुधवार को यह मुद्दा उठाया गया था।
राजनाथ सिंह ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि इस विधेयक के दायरे में सभी राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि केन्द्र असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में शांति एवं सामाजिक समरसता कायम रखने के लिए हर संभव उपाय करेगा और इन राज्यों के साथ बैठक की जाएगी।
उन्होंने कुछ जातिवर्ग की आशंकाओं पर कहा कि इसके विरोध में असम, त्रिपुरा एवं मेघालय में हिंसा की छिटपुट घटनाएं हुई हैं, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह से शांतिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि केन्द्र असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में शांति एवं सामाजिक समरसता कायम रखने के लिए हर संभव उपाय करेगा।
सिंह ने कहा कि यह विधेयक नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल के बजाय छह साल भारत में गुजारने पर भारतीय नागरिकता मिल सकेगी।
मालूम हो कि संसद में नागरिकता संबंधी विधेयक पेश होने के बाद इसका विरोध कर रहे कांग्रेस सदस्यों ने गृह मंत्री से पूर्वोत्तर राज्यों में कानून व्यवस्था पर जवाब मांगा था।