केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि सेना को मोन के ओटिंग में उग्रवादियों की गतिविधियों की सूचना मिली थी। इस पर 21 कमांडो ने संदिग्ध इलाके में घात लगाई थी। एक वाहन वहां पहुंचा था, जिसे रुकने का इशारा किया गया लेकिन वह नहीं रुका। इस संदेह पर कि उग्रवादी हो सकते हैं, जवानों ने गोलियां चलाईं। शाह ने कहा कि वाहन में मौजूद आठ में से छह लोगों की मौत हो गई। घायल हुए दो लोगों को सेना के ही जवान पास के स्वास्थ्य केंद्र ले गए।
उन्होंने आगे कहा कि इस घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय ग्रामीणों ने सेना की इकाई को घेर लिया। ग्रामीणों ने दो वाहनों को आग लगा दी और जवानों पर हमला कर दिया। इस दौरान हमारे एक जवान की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इस पर आत्मरक्षा और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जवानों को गोलियां चलानी पड़ीं। इस दौरान गोलीबारी में सात और नागरिकों की जान चली गई और कुछ अन्य घायल हो गए।
शाह ने कहा कि इस घटना के बाद पांच दिसंबर की शाम को लगभग 250 लोगों की आक्रोशित भीड़ ने असम रायफल्स के मोन शहर में स्थित कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) में तोड़-फोड़ कर दी और सीओबी की इमारत को आग लगा दी। असम रायफल्स को भीड़ के तितर-बितर करने के लिए गोलीबारी करनी पड़ी और इसमें एक और नागरिक की जान चली गई। उन्होंने आगे कहा कि प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त बलों की तैनाती कर दी गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सेना के तीसरे कोर मुख्यालय की ओर से एक बयान जारी किया गया है और इन दुर्भाग्यपूर्ण हादसों को लेकर संवेदना जताई है। सेना इस मामले की उच्चत्तम स्तर पर जांच कर रही है और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मैंने इस घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री से बात की थी। गृह मंत्रालय ने भी मुख्य सचिव और डीजीपी से संपर्क किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि कल स्थिति की समीक्षा की गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तुरंत उत्तर-पूर्व के प्रभारी अतिरिक्त सचिव को कोहिमा के लिए रवाना कर दिया था जहां उन्होंने मुख्य सचिव, वरिष्ठ अधिकारियों और पैरामिलिट्री बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की है। इस बैठक में स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई।