केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय की 160वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि आजादी के तुरंत बाद ही पंडित जी को भारत रत्न मिल जाना चाहिए था। खैर जब 2014 में उन्हें भारत रत्न मिला, तो बहुत लोगों ने कहा कि पंडित जी को भारत रत्न देने की जरुरत नहीं थी। महामना यह उनके लिए बहुत बड़ी उपाधि थी।
उन्होंने मालवीय को याद करते हुए कहा कि महामना ने कई संगठनों में काम किया। आज आप सोच भी नहीं सकते कि कोई एक ही समय में कांग्रेस और हिंदू महासभा का मुखिया हो सकता है। शाह ने कहा कि मालवीय जी व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्थान थे। आजादी की लड़ाई उन्होंने सिर्फ राजनेता के तौर पर नहीं लड़ी, बल्कि एक पत्रकार के तौर पर भी लड़ी। वकालत के जरिए भी उन्होंने मोर्चा संभाले रखा। वे मातृभाषा, भारतीय संस्कृति और भारतीयता का एक साथ उद्घोष करने वाले एक मात्र स्वतंत्रता सेनानी थे।
अमित शाह ने कहा कि स्वधर्म, स्वभाषा, भारतीय संस्कृति और स्वराज इन चारों चीजों को शिक्षा के साथ बुनना और आधुनिक शिक्षा से युक्त युवाओं को देश के पुननिर्माण में लगाना इस उद्देश्य को उस जमाने में मालवीय जी ने जमीन पर उतारा।
गृह मंत्री ने कहा कि पं. मालवीय एक सफलतम वकील के साथ साथ भारतीय परंपरा के पोषक और चिंतक भी थे। उनके मृदुभाषी व्यक्तित्व की इससे बड़ी मिसाल और क्या होगी कि उन्होंने एक साथ कई संस्थाओं और संगठनों में काम किया। यहां तक कि वैचारिक मतभेद रखने वाली संस्थाओं में भी लंबे समय तक काम किया। मौजूदा वक्त में आप सोच भी नहीं सकते कि कोई व्यक्ति एक ही समय में कांग्रेस और हिंदू महासभा का मुखिया हो सकता है।