फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yashwant Verma: जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए सरकार ने सांसदों के हस्ताक्षर लेने शुरू किए, महाभियोग प्रस्ताव तय

Sat, 12 Jul 2025 07:31 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने पिछले दिनों बताया कि महाभियोग प्रस्ताव संसद के मानसून सत्र में आएगा। सत्र 21 जुलाई से आरंभ हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर सहयोग लेने के लिए विपक्षी दलों से भी बात कर रही है क्योंकि यह भ्रष्टाचार से जुड़ा मुद्दा है और इसलिए इसमें किसी तरह की राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं है।
विज्ञापन
जस्टिस यशवंत वर्मा - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार ने घर से जली हुई करोड़ों की नकदी मिलने के मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर लेना आरंभ कर दिया है। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि संसद के निचले सदन में ही जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए प्रस्ताव पर 100 सांसदों के हस्ताक्षर होना जरूरी है। सूत्रों ने बताया कि कई सांसदों के हस्ताक्षर लिए जा चुके हैं। अगर प्रस्ताव राज्यसभा में लाया जाता तो 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें: अहमदाबाद विमान हादसा: वॉल स्ट्रीट जर्नल का दावा- नियंत्रण प्रणाली को गलत संकेत भेजने से गिरा एअर इंडिया विमान

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने पिछले दिनों बताया कि महाभियोग प्रस्ताव संसद के मानसून सत्र में आएगा। सत्र 21 जुलाई से आरंभ हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर सहयोग लेने के लिए विपक्षी दलों से भी बात कर रही है क्योंकि यह भ्रष्टाचार से जुड़ा मुद्दा है और इसलिए इसमें किसी तरह की राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Amit Shah In Kerala: आज से निकाय चुनाव प्रचार अभियान का आगाज; शाह BJP कार्यालय का उद्घाटन करेंगे, तैयारी पूरी

आवास से पुलिस को मिली थी जली हुई नकदी
अभी इलाहाबाद हाईकोर्ट में पदस्थापित जस्टिस वर्मा जब दिल्ली हाईकोर्ट में तैनात थे तब उनके सरकारी आवास में लगी आग के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी बरामद हुई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति ने जांच में पाया था कि यह नकदी गलत तरीके से जमा की गई थी। इसके बाद ही जस्टिस वर्मा को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया था। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें