विजयन ने सोमवार को केंद्र सरकार के विभिन्न आर्थिक नीतिगत फैसलों का जिक्र किया और कहा कि केंद्र ने केरल के लिए लगातार हानिकारक कदम उठाए गए और केंद्रीय मंत्री ने सरकार के कामों को लेकर झूठा प्रचार करने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की उधार लेने की क्षमता में कटौती करने के अलावा केंद्र सरकार ने जीएसटी मुआवजे को खत्म कर दिया, जबकि कुछ और वर्षों तक इसे जारी रखने का अनुरोध किया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केरल का आर्थिक गला घोंट रही है और जनमत इसके खिलाफ आता है तो झूठ फैलाती है और हमारे राज्यों की जरूरतों को छिपाती है। यहां तिरुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी, राज्य में 2018 और 2019 में बाढ़ के मद्देनजर कई राज्यों जीएसटी मुआवजे की व्यवस्था को जारी रखने का अनुरोध किया था। लेकिन, केंद्रीय वित्त मंत्री ने केंद्र को कथित तौर पर जीएसटी के आंकड़े न देने के लिए राज्य को दोषी ठहराया और उस मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जीएसटी खातों को महालेखाकार को सौंप दिया गया है, जिन्हें इसे जीएसटी परिषद के समक्ष रखना है। विजयन ने दावा किया कि 2017-18 से विभिन्न मदों में केंद्र पर कई सौ करोड़ रुपये बकाया हैं और इसका एक बड़ा हिस्सा पिछले तीन वित्त वर्षों से बकाया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के अधिकारियों और मंत्रियों द्वारा केंद्र के साथ कई दौर की चर्चा के बावजूद बकाया राशि का निपटान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद केंद्रीय वित्त मंत्री खुद गलत और आधारहीन दावे कर रही हैं। विजयन ने कहा कि राज्य मुफ्त की चीजें या केंद्र की उदारता नहीं मांग रहा है, वह उस चीज की मांग कर रहा है कि जिसका वह हकदार है। सीतारमण ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि दक्षिणी राज्य को समय पर धन वितरित किया जा रहा है।
उन्होंने केरल की वाम सरकार के धन आवंटन में लापरवाही के आरोपों को भी खारिज कर दिया था। केंद्रीय वित्त मंत्री ने केंद्र द्वारा विभिन्न श्रेणियों के तहत धन जारी न करने के लिए भी राज्य सरकार को दोषी ठहराया था और आरोप लगाया था कि वाम सरकार आवश्यक मानदंडों को पूरा करने में विफल रही है।