रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार
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केंद्रीय रक्षा सचिव डॉ अजय कुमार ने कहा, साइबर स्पेस में होने वाले हमलों से 'आत्मनिर्भर भारत' न सिर्फ मजबूती से लड़ेगा बल्कि अपनी एक अलग पहचान भी बनाएगा। इसके लिए देश के तमाम प्रौद्योगिकी संस्थानों में ना सिर्फ लोगों को साइबर हमलों के बारे में जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है, बल्कि देश के तमाम स्टार्टअप्स और डीआरडीओ जैसी तमाम संस्थाओं के साथ मिलकर देसी तकनीक का विकास भी किया जा रहा है। हमारा नेटवर्क डिवाइस जितना ज्यादा सुरक्षित होगा, उतना ज्यादा साइबर हमलों को हम रोक सकेंगें।
रक्षा सचिव सोमवार को इंटरनेशनल साइबर सिक्योरिटी एंड इनफार्मेशन कॉन्फ्रेंस में तमाम साइबर एक्सपर्ट से रूबरू थे। अजय कुमार ने कहा कि डाटा और सूचनाएं बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। इनके लीक होने से थिंकिंग पावर को मैनिपुलेट किया जा सकता है। उन्होंने माना कि साइबर सिक्योरिटी के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों की आवश्यकता है, जो इस पर काम करके साइबर स्पेस को सुरक्षित रख सकें। यही वजह है सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने देश के अलग-अलग प्रौद्योगिकी संस्थानों में साइबर सिक्योरिटी जागरूकता और उससे संबंधित जानकारी रखने वाले कोर्सेज को पेश किया है।
डॉ अजय कुमार ने कहा कि हमें आत्मनिर्भर भारत के माध्यम से साइबरस्पेस को और ज्यादा मजबूत करने में मदद मिलेगी। उनका कहना है, इसके तहत बहुत सारे नेटवर्क डिवाइसेज सूचना तंत्र और साइबर डाटा इनफार्मेशन लीकेज से सुरक्षित होंगी। उन्होंने बताया आईआईटी चेन्नई के साथ मिलकर इस तरीके के कई प्रयोग भी किए जा रहे हैं।
रक्षा सचिव ने कहा कि निश्चित तौर पर डाटा हमारे देश से दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में ट्रांसफर हो रहा है। डाटा और सूचनाएं ट्रांसफर होने के बहुत से रास्ते हैं। जिसमें सोशल मीडिया से लेकर दूसरी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज से जुड़ना और उनका इस्तेमाल होना शामिल है। उन्होंने कहा कि हमें तकनीकी सौदों में इंडस्ट्री के साथ खरीददार और विक्रेता से आगे बढ़कर पार्टनरशिप के तरीके से काम करने की आवश्यकता है। जिससे हम एक ऐसे विश्वास के प्लेटफार्म पर मिलकर काम कर सके जहां पर साइबर सिक्योरिटी को तोड़ा ना जा सके।