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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी बोले - एयर इंडिया के लिए बोली लगाने से जुड़ी शर्तों में बदलाव किया

Thu, 29 Oct 2020 07:24 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हरदीप सिंह पुरी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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केंद्रीय नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि एयर इंडिया के लिए बोली लगाने से जुड़ी शर्तों में बदलाव करने का फैसला किया गया है। पुरी ने कहा कि अब एंटरप्राइज रेट पर बोली आमंत्रित किया गया है। 

विमानन मंत्रालय के सचिव प्रदीप सिंह खरोला प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना संकट के बाद से परिस्थितियों में काफी बदलाव आए हैं। खरोला ने आगे कहा कि यही वजह है कि बदली हुई परिस्थितियों के चलते शर्तों में बदलाव करने का निर्णय लिया गया है। नई शर्तों के अनुसार, अब बोलीदाताओं को इस बात की जानकारी देनी होगी कि वो एअर इंडिया के कितने कर्ज की जिम्मेदारी उठा पाएंगे। 

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नियम बदलने पर बढ़ सकती है समयसीमा 
बोली के नियमों के परिवर्तन के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया को खरीदने की इच्छुक कंपनियों के लिए बोली लागाने की समयसीमा को 14 दिसंबर तक बढ़ाई जा सकती है। सरकार एयर इंडिया पर भारी भरकम कर्ज की जिम्मेदारी पर भी और लचीला रुख अपना सकती है। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 30 अक्तूबर है। सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया विशिष्ट वैकल्पिक व्यवस्था (एआईएसएएम) ने एयरलाइन बोली लगाने की समयसीमा को 14 दिसंबर तक बढ़ाने के वास्ते सहमति जता दी है। इससे संभावित निवेशकों को प्राथमिक सूचना ज्ञापन (पीआईएम) में किए जा रहे बदलावों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अधिक समय मिल जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, बोली के लिए और समय देने के साथ सरकार संभावित निवेशकों को एयर इंडिया पर 60,074 करोड़ रुपये के कर्ज के मामले में अधिक लचीला रुख अपना सकती है। वर्तमान निविदा दस्तावेज के अनुसार, खरीदार को एयर इंडिया का एक तिहाई बोझा उठाना होगा। शेष कर्ज राशि को एक विशेष उद्देशीय निकाय के हवाले किया जाएगा। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) द्वारा इस साल जनवरी में जारी किए गए रुचि पत्र आमंत्रण में 31 मार्च, 2019 को एयर इंडिया का कुल कर्ज 60,074 करोड़ रुपये बताया गया। विमानन कंपनी के खरीदार को इसमें से 23,286.5 करोड़ रुपये का कर्ज अपने ऊपर लेने की शर्त है।शेष कर्ज एयर इंडिया एसेट हाल्डिंग्स लिमिटेड (एआईएएचएल) के हवाले कर दिया जाएगा।

सरकार अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहती है 
सरकार इस राष्ट्रीय विमानन कंपनी में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। इसमें एयर इंडिया की उसकी अनुषंगी एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी और एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सविर्सिज प्रा. लि. में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी भी शामिल है।

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