केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उप योजनाओं को क्लब करने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी हैं। सरकार ने शुक्रवार को 2021 से पांच साल की अवधि में 4,797 करोड़ रुपये की लागत से पृथ्वी विज्ञान पहल को मंजूरी दे दी हैं। इस योजना में वायुमंडल और जलवायु अनुसंधान मॉडलिंग अवलोकन प्रणाली और सेवाएं, महासागर सेवाएं, मॉडलिंग अनुप्रयोग, संसाधन और प्रौद्योगिकी, ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर अनुसंधान, भूकंप विज्ञा और विज्ञान का अध्ययन शामिल हैं।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि पृथ्वी विज्ञान की व्यापक योजना कई एमओईएस संस्थानों में एकीकृत बहु विषयक पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान और अभिनव कार्यक्रमों के विकास को सक्षम बनाएगी। ये एकीकृत अनुसंधान और विकास, मौसम और जलवायु, महासागर, क्रायोस्फीयर, भूकंपीय विज्ञान और सेवाओं की बड़ी चुनौतियों के समाधान करने और उनके टिकाऊ दोहन के लिए जीवित और गैर जीवित संसाधनों का पता लगाने में मदद करेंगे।
पृथ्वी योजना के उद्देश्यों में पृथ्वी प्रणाली और परिवर्तन के महत्वपूर्ण संकेतों को रिकॉर्ड करने के लिए वायुमंडल, महासागर ,भूमंडल, क्रायोस्फीयर और ठोस पृथ्वी के दीर्घकालिक अवलोकनों को बढ़ाना और बनाए रखना। साथ ही, मौसम को समझने और भविष्यवाणी करने के लिए मॉडलिंग सिस्टम का विकास शामिल हैं। इसमें नई घटनाओं और संसाधनों की खोज के लिए पृथ्वी के ध्रुवीय और उच्च समुद्री क्षेत्रों की खोज, सामाजिक अनुप्रयोगों के लिए समुद्रीय संसाधनों की खोज और टिकाऊ दोहन के लिए प्रौद्योगिकी का विकास शामिल हैं।
भारत-मॉरीशस संयुक्त रूप से एक छोटा उपग्रह भेजेगा
भारत और मॉरीशस संयुक्त रूप से एक छोटा उपग्रह विकसित करेंगे। इस उपग्रह को अगले साल इसरो द्वारा लॉन्च किया जाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।
भारत और मॉरीशस ने पिछले साल एक नवंबर को विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन की पोर्ट लुइस यात्रा के दौरान एक संयुक्त छोटे उपग्रह के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। आधिकारिक बयान में कहा गया कि संयुक्त उपग्रह के लिए कुछ उपप्रणालियां भारतीय उद्योगों की भागीदारी के माध्यम से शुरू की जाएंगी और इससे उद्योग को लाभ होगा। इसमें कहा गया है कि उपग्रह कार्यान्वयन को 15 महीने की समय सीमा में पूरा करने का प्रस्ताव है।
रेलवे में कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए कैबिनेट की मंजूरी
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान भारतीय रेलवे को 2030 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने करने में मदद के लिए भारत और यूएसएआईडी के बीच हस्ताक्षरित एक समाझौता ज्ञापन को मंजूरी दे दी गई हैं। भारतीय रेलवे ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस बयान में कहा कि एमओयू भारतीय रेलवे को रेलवे क्षेत्र में नवीनतम विकास और ज्ञान को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। रेलवे के मुताबिक, एमओयू से डीजल और कोयले जैसे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि भारतीय रेलवे के मुताबिक, रेलवे प्लेटफार्मों पर छत पर सौर प्रणाली की तैनाती के लिए यूएसएआईडी/भारत के साथ काम किया था।