केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल ओर संरक्षण) अधिनियम 2015 को संशोधन की मंजूरी दे दी। संशोधित कानून से बाल संरक्षण को लेकर जिलाधिकारियों और अतिरिक्त जिलाधिकारियों के अधिकारों में बढ़ोत्तरी होगी।
अब बाल संरक्षण गृह इनके दायरे में आएंगे और बालकल्याण समितियां (सीडब्ल्यूसी) भी इनके मातहत चलेंगी। इसके अलावा बाल कल्याण समितियों के सदस्यों की शैक्षिक योग्यता, पृष्ठभूमि और सामाजिक स्थिति का आकलन करके ही उन्हें बाल कल्याण समितियों में नियुक्ति मिलेगी।
केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि संशोधन प्रस्ताव में बच्चों का सर्वोत्तम हित और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए अतिरिक्त जिला अधिकारी और जिला अधिकारी को अधिकृत किया गया है। इतना ही नहीं संशोधन से जिला प्रशासन की जवाबदेही बढ़ेगी। सरकार ने इन बदलावों से जिला मजिस्ट्रेट को बाल संरक्षण के लिए अधिक सशक्त बनाया है, ताकि उनके मातहत आने वाले बाल अधिकार और बच्चों से जुड़े मामलों का अधिक सुचारु ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
संकट की स्थितियों में बच्चों के पक्ष में प्रयासों को बढ़ावा मिले और त्वरित गति से निर्णय भी हो सके। स्मृति ईरानी ने बताया कि बाल संरक्षण गृह के पंजीयन से जिलाधिकारी के नेतृत्व में संस्था और उसकी पृष्ठभूमि की जांच की जाएगी। इसके बाद वह राज्य सरकार को उस गृह को पंजीयन प्रदान करने के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा डीएम अपने स्तर से किसी भी सीडब्ल्यूसी , किशोर संरक्षण इकाइयों की जांच कर सकेंगे। साथ ही बच्चों की सुरक्षा की परिभाषा में अब तस्करी और नशीले पदार्थों के शिकार तथा उनके अभिभावकों द्वारा छोड़े गए बच्चों को भी देखभाल की जरूरत के तहत शामिल किया गया है। संशोधित कानून में निर्धारित अपराध को गंभीर अपराध की श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा।
जिला अधिकारी दे सकेंगे गोद लेने का आदेश
संशोधन के बाद जिला अधिकारी व अतिरिक्त जिला अधिकारी जुवेनाइल कानून अधिनियम की धारा 61 के तहत गोद लेने के आदेश जारी कर सकेंगे। इससे गोद लेने की जटिल प्रक्रिया को भी आसान किया जाएगा। वहीं गोद लेने से जुड़े विवादों का निपटारा तेज गति से हो सकेगा।
ये बदलाव भी होगें
जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम के वर्तमान सजा प्रावधानों को लेकर कई भ्रांतियां थीं, संशोधन में इनमें सुधार किया गया है। अभी कानून के तहत तीन तरह के अपराध रखे गए हैं, जिसमें छोटे, गंभीर और जघन्य अपराध शामिल हैं। इसमें अब एक और श्रेणी में उन अपराधों को शामिल किया जाएगा जहां सजा सात साल से अधिक है लेकिन कोई न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं है या सात साल से कम की न्यूनतम सजा प्रदान की जाती है।