केंद्र सरकार ने मंगलवार को सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) मोड में ई-कॉमर्स माध्यम से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हब स्थापित करने की घोषणा की। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि निर्बाध विनियामक और लॉजिस्टिक ढांचे के तहत ये हब एक ही छत के नीचे व्यापार और निर्यात से संबंधित सेवाओं की सुविधा प्रदान करेंगे।
नियामक ढांचा सितंबर तक तैयार होने की उम्मीद
वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने हाल ही में कहा है कि ई-कॉमर्स माध्यम के माध्यम से देश के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक नियामक ढांचा सितंबर तक तैयार होने की उम्मीद है। वर्तमान में, इस माध्यम से भारत का निर्यात सालाना लगभग 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जबकि पड़ोसी देश चीन का 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। आने वाले वर्षों में इसे 50-100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने की संभावना है।
ई-कॉमर्स केंद्रों से निर्यात के बहुत बड़े अवसर
इन ई-कॉमर्स केंद्रों के जरिए, छोटे उत्पादकों को एग्रीगेटर्स को बेचने की सुविधा दी जाएगी और फिर एग्रीगेटर को बेचने के लिए बाजार मिलेंगे। जिन निर्यात उत्पादों में अपार संभावनाएं हैं, उनमें आभूषण, परिधान, हस्तशिल्प और ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) सामान शामिल हैं। वाणिज्य मंत्रालय की शाखा डीजीएफटी भी आरबीआई और वित्त मंत्रालय समेत तमाम संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर ई-कॉमर्स माध्यम से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है, क्योंकि इस क्षेत्र में निर्यात के बहुत बड़े अवसर हैं।
ऐसे हम में निर्यात मंजूरी को सुगम बनाया जा सकता है। इसके अलावा इसमें वेयरहाउसिंग सुविधाएं, सीमा शुल्क निकासी, रिटर्न प्रोसेसिंग, लेबलिंग, परीक्षण और री-पैकेजिंग भी हो सकती है।
सीमा पार ई-कॉमर्स व्यापार में बेहतर बढ़ोत्तरी का अनुमान
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ के महानिदेशक अजय सहाय ने पहले कहा था कि यह एक तरह का बॉन्डेड जोन होगा, जो ई-कॉमर्स कार्गो के निर्यात और आयात को सुगम बनाएगा और काफी हद तक पुनः आयात की समस्या का समाधान करेगा, क्योंकि ई-कॉमर्स में लगभग 25 प्रतिशत माल पुनः आयात किया जाता है। पिछले साल, सीमा पार ई-कॉमर्स व्यापार लगभग 800 बिलियन अमेरिकी डॉलर था और 2030 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
वहीं आर्थिक थिंक टैंक जीटीआरआई की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के ई-कॉमर्स निर्यात में 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की क्षमता है, लेकिन बैंकिंग मुद्दे विकास में बाधा डालते हैं और परिचालन लागत बढ़ाते हैं। भारत ने 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापारिक निर्यात का लक्ष्य रखा है और सीमा पार ई-कॉमर्स व्यापार को इस लक्ष्य को पूरा करने के माध्यमों में से एक के रूप में पहचाना गया है।