केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश किया। इसमें वित्त मंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से जुड़े कई बड़े एलान किए। साथ ही, रेलवे व्यवस्था को बेहतर करने के लिए हाई-स्पीड ट्रेनों के प्रसार की बड़ी घोषणा की। इनमें एक बड़ा एलान सबसे तेज गति से चलने वालीं वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का भी रहा।
रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य सुबोध जैन ने अमर उजाला से कहा कि रेल बजट को लेकर जो दो बड़ी घोषणाएं की गई हैं, वह बहुत ही सकारात्मक और इनोवेटिव है। सरकार ने बजट में जो 100 गति शक्ति टर्मिनल बनाने की घोषणा की है। इससे उद्योगों को बहुत फायदा होगा, क्योंकि इससे उनकी लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बहुत कम हो जाएगी। सरकार को इन टर्मिनल को बनाने के लिए एक मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होगी, क्योंकि आमतौर पर यह देखने में आता है कि रेलवे की प्रोजेक्ट की घोषणा तो जोरशोर से हो जाती है लेकिन प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण करने में रेलवे की हालत खराब हो जाती है। आज तक कई अहम प्रोजेक्ट केवल जमीन अधिग्रहण के मामले के चलते ही देरी से पूरे हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जहां तक 400 नई वंदे भारत ट्रेनें चलाने की बात है तो यह रेलवे के लिहाज से बहुत ही अहम घोषणा है। लेकिन यह सोचने वाली बात है कि 400 नई वंदे भारत ट्रेनों, जिनकी अनुमानित 60 हजार करोड़ की लागत आएगी वो कब तक पूरा हो सकेगा। क्योंकि रेलवे को जो कार्य पद्धति है और टेंडर निकालने की नीति है वह बहुत ही धीमी है। 15 अगस्त को पीएम ने 75 हफ्ते में 75 नई वंदे भारत ट्रेनें चलाने का एलान किया था, लेकिन निर्माण कार्य में देरी के चलते आज तक एक भी ट्रेन बनकर तैयार नहीं हुई है। ऐसे में यह 400 ट्रेनें कब तैयार होंगी और कब आएंगी ये एक बड़ा सवाल है।
वित्त मंत्री की ओर से रेल मंत्रालय को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट में 140367.13 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि रेलवे आने वाले समय में नए उत्पाद की तैयारी और उनके प्रसार में काम करेगा। रेलवे के नेटवर्क के पोस्टल नेटवर्क के साथ एकीकरण के जरिए पार्सल की आवाजाही को सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा एक स्टेशन-एक उत्पाद की अवधारणा के जरिए स्थानीय व्यापार और सप्लाई चेन की बेहतरी की कोशिश की जाएगी।
वित्तमंत्री ने कहा कि 2022-23 में दो हजार किमी के रेलवे नेटवर्क को 'कवच' के अंतर्गत लाया जाएगा। यह स्वदेशी विश्वस्तरीय तकनीक है, जिसके जरिए सुरक्षा और क्षमता दोनों को बढ़ाने का काम होगा। इसके अलावा मेट्रो सिस्टम को बेहतर करने के लिए नए तरीके लागू किए जाएंगे। रेलवे स्टेशन और शहरी परिवहन के बीच मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी को प्राथमिकता से बढ़ावा दिया जाएगा। भारत की स्थितियों और जरूरतों के तहत नए मेट्रो सिस्टम भी तैयार किए जाएंगे।