केरल हाईकोर्ट ने पेरियार नदी की सफाई और संरक्षण के लिए एकीकृत निगरानी प्राधिकरण बनाने की जरूरत पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि लाखों लोगों की जिंदगी नदी पर निर्भर है। प्रदूषण रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की नई समयसीमा तय करने और सभी पक्षों को जिम्मेदारी निभाने का निर्देश दिया।
केरल हाईकोर्ट ने पेरियार नदी की बढ़ती प्रदूषण समस्या पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि नदी की स्वच्छता और संरक्षण की निगरानी के लिए एक एकीकृत (यूनिफाइड) प्राधिकरण का गठन बेहद जरूरी है। अदालत ने कहा कि इस नदी पर लाखों लोगों का जीवन निर्भर है और हालात बिगड़ने का इंतजार नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने कहा कि पेरियार नदी के महत्व को देखते हुए इसके लिए एक समन्वित निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता पर किसी अतिरिक्त जोर की जरूरत नहीं है। अदालत ने याद दिलाया कि राज्य सरकार ने सितंबर 2025 में एक 'इंटीग्रेटेड रिवर बेसिन कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट प्लान' बनाने का सुझाव दिया था।
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'लाखों लोगों की जिंदगी दांव पर लगी है'
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, 'लाखों लोगों की जिंदगी दांव पर लगी है और हमें किसी बड़े संकट का इंतजार नहीं करना चाहिए। सभी संबंधित पक्षों को जिम्मेदारी से काम करते हुए नदी को बचाने के लिए आवश्यक रोकथाम और सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए'। यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें उद्योगों और अलुवा मार्केट से निकलने वाले अपशिष्ट एवं गंदे पानी को पेरियार नदी में डाले जाने पर रोक लगाने की मांग की गई है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी निर्देश
केरल हाईकोर्ट ने केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी निर्देश दिया कि वह नदी प्रदूषण रोकने के लिए प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने की नई समयसीमा प्रस्तुत करे और उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करे। अदालत ने कहा कि एसटीपी की स्थापना नदी से जुड़ी जैव विविधता, वनस्पतियों और जीव-जंतुओं की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अदालत को बताया कि पहले तय की गई समयसीमा का पालन राज्य विधानसभा चुनावों के कारण नहीं हो सका। मामले की अगली सुनवाई में अदालत नदी संरक्षण से जुड़े कदमों और एसटीपी परियोजना की प्रगति की समीक्षा करेगी।