कुपोषित बच्चों की तेजी से बढ़ रही संख्या रोकने के लिए यूनिसेफ ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर इसके खात्मे की योजना बनाई है। यूनिसेफ की ओर से इसके लिए गांवों में सपोर्ट ग्रुप तैयार कराया जाएगा। इसके लिए आईकेईए फाउंडेशन की मदद ली जाएगी जो पूरे प्रदेश में कार्य करेगी।
सपोर्ट ग्रुप में केवल महिलाएं ही होंगी और ये घर-घर जाकर लोगों को बच्चों को जरूरी आहार समय से देने के लिए जागरूक करेंगी। नई दिल्ली में दो दिवसीय वर्कशॉप के दौरान इसके अभियान की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा हुई।
इन पर काम करेगा सपोर्ट ग्रुप
सपोर्ट ग्रुप में शामिल की जाने वाली महिलाओं को बच्चों को जन्म के बाद से दो साल तक उचित आहार देने, स्तनपान कराने सहित अन्य जानकारियां देने की जिम्मेदारी महिलाओं पर ही रहेगी। इसमें आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और गांव की दो-तीन महिलाओं को शामिल किया जाएगा। जरूरत पंड़ने पर पंचायती राज विभाग, स्वयंसेवी समूहों की भी मदद ली जाएगी।
दो साल तक होता है बच्चों का सही विकास
यूनिसेफ, अमर उजाला और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 25-26 जून को आयोजित क्रिटिकल अप्रेजल स्किल्स वर्कशॉप में बच्चों में होने वाली बीमारियां उससे बचाव के लिए लगने वाले टीकों के बारे में जानकारी दी गई।
इस दौरान यूनिसेफ की पोषण एक्सपर्ट गायत्री सिंह ने बताया कि बच्चों में विकास का सही समय छह माह से दो साल तक होता है। इस दौरान बच्चों को उचित आहार न मिलने का बड़ा कारण माताओं की लापरवाही भी होता है। बहुत सी महिलाएं बच्चों के जन्म के शुरूआती छह महीने तक बच्चों को नियमित स्तनपान नहीं कराती है। वह कहती हैं कि इसके अलावा जो आहार बच्चों को मिलना चाहिए, उन्हें वह भी नहीं मिल पाता है।
इस वजह से बढ़ रहा है बच्चों में कुपोषण
कुपोषण से प्रभावित बच्चों की संख्या बढ़ने का यह अहम कारण है। दो साल तक की आयु वाले महज 10 प्रतिशत बच्चे ही देश में ऐसे हैं, जिन्हें पूरा आहार मिलता है। बताया, यूनिसेफ ने सपोर्ट ग्रुप के माध्यम से जागरूकता का बीड़ा उठाया है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे यूपी के ललितपुर जिले में चलाया गया। यहां सफलता के बाद अब सभी जिलों में लागू करने की तैयारी है।