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शहरी भारतीयों की सबसे बड़ी चिंता बेरोजगारी, 69 फीसदी मानते हैं देश सही रास्ते पर

Sat, 28 Dec 2019 05:40 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • रिसर्च कंपनी इप्सोस के 'व्हाट वरीज द वर्ल्ड' सर्वे में सामने आई जानकारी
  • 61 प्रतिशत वैश्विक नागरिकों ने माना- उनका देश गलत दिशा में जा रहा है
  • दुनिया में निराशावाद के विपरीत भारत में नीतियों को लेकर लोग आशावादी
  • कम से कम 46 प्रतिशत शहरी भारतीय बेरोजगारी को लेकर काफी परेशान
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
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देश के करीब आधे शहरी भारतीय खासकर युवा बेरोजगारी को लेकर सबसे अधिक चिंतित हैं। हालांकि 69 फीसदी नागरिकों का मानना है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका खुलासा रिसर्च कंपनी इप्सोस के एक सर्वे से हुआ है।

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इप्सोस के ‘व्हॉट वरीज द वर्ल्ड’ विषय पर किए सर्वे के अनुसार, वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार, अपराध और हिंसा, गरीबी और सामाजिक असमानता तथा जलवायु परिवर्तन अन्य मुद्दे हैं जो देशवासियों को परेशान करते हैं। 

सर्वे के अनुसार, दुनिया में निराशावाद के विपरीत भारत में नीतियों को लेकर लोग आशावादी हैं। 69 फीसदी शहरी भारतीय मानते हैं कि देश सही रास्ते पर है, जबकि 61 फीसदी वैश्विक नागरिकों का मानना है कि उनका देश गलत दिशा में जा रहा है। 
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इस सर्वे में कहा गया है कि सर्वे में शामिल कम से कम 46 प्रतिशत शहरी भारतीय बेरोजगारी को लेकर काफी परेशान हैं। अक्तूबर के मुकाबले नवंबर में इसमें तीन फीसदी की और वृद्धि हुई है। यह सर्वे इसी दौरान किया गया।

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ये मुद्दे भी कर रहे परेशान

सर्वे के मुताबिक, कुछ अन्य मुद्दे जो भारतीयों को परेशान कर रहे हैं, उसमें वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार, अपराध और हिंसा, गरीबी और सामाजिक असमानता और जलवायु परिवर्तन हैं। वहीं, दूसरी तरफ गरीबी और सामाजिक असमानता वैश्विक नागरिकों के लिये शीर्ष चिंता का विषय है। उसके बाद बेरोजगारी, अपराध और हिंसा, वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार तथा स्वास्थ्य का स्थान है।

ऐसे किया गया सर्वे

सर्वे हर महीने 28 देशों में इप्सोस ऑनलाइन पैनल सिस्टम के जरिए किया जाता है। इस सर्वे में 20,000 वयस्कों को शामिल किया गया। इनमें कम से कम 500 लोग भारत के हैं। इस्राइल, मैक्सिको, चीन, पोलैंड और रूस आदि देशों के भी इतने ही लोगों से सर्वे में राय ली गई।

कुछ अहम बिंदु

  • राष्ट्रीय सूचकांक मामले में शीर्ष पर चीन है। उसका सूचकांक 69.1 है। इसके बाद सऊदी अरब 62.8, अमेरिका 61.9 और भारत का 61.1 है।
  • राष्ट्रीय सूचकांक के संदर्भ में सबसे नीचे तुर्की है। उसका राष्ट्रीय सूचकांक 33.7 है। इसके अलावा अर्जेंटीना का 37.8 और रूस का 38.1 है।
  • रोजगार सूचकांक 5.7 फीसदी तक गिरा, उम्मीद सूचकांक में 2.4 फीसदी तक गिरावट, निवेश सूचकांक में तीन फीसदी तक आई कमी।


राष्ट्रीय सूचकांक- दिसंबर 2019

रोजगार सूचकांक : वैश्विक औसत 56.2, त्रैमासिक रुझान -1.2
ऊंची छलांग : अमेरिका +3.1, सऊदी अरब +2.5
सर्वाधिक गिरावट : भारत -5.7, तुर्की -5.2, रूस -3.9

उम्मीद सूचकांक : वैश्विक औसत 56.8, त्रैमासिक रुझान -0.3
ऊंची छलांग : अर्जेंटीना +2.4, हंगरी +2.3
सर्वाधिक गिरावट : पोलैंड -3.8, भारत -2.4, इटली -2.1

निवेश सूचकांक : वैश्विक औसत 42.2, त्रैमासिक रुझान -1.2
ऊंची छलांग : हंगरी +5.4, भारत +3.0, इस्राइल +2.2
सर्वाधिक गिरावट : सऊदी अरब -5.3, स्वीडन -5.0, इटली -3.7
 

नौकरियों की कमी शहरी भारतीयों को परेशान करती है। रोजगार सृजन पर जोर देने की जरूरत है। अन्य समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान देना होगा।
- परिजात चक्रवर्ती, पब्लिक अफेयर्स एंड कॉरपोरेट रेप्यूटेशन, कंट्री सर्विस लाइन लीडर, इप्सोस इंडिया

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