यह सही है कि भारत में यूथ वर्क फोर्स का बड़ा आंकड़ा है। करीब 65 फीसदी आबादी ऐसी है, जिसकी औसत आयु 35 या उससे कम है। दूसरे देश इस आंकड़े से खासे प्रभावित हैं। लेकिन बेरोजगारी ने यंग इंडिया का भरोसा तोड़ दिया है। देश के युवाओं को न प्राइवेट क्षेत्र में रोजगार मिल रहा है और न ही सरकारी। युवाओं के हितों को लेकर लगातार आवाज बुलंद करने वाले युवा हल्लाबोल के संस्थापक अनुपम यहीं पर नहीं रूके, उन्होंने आगे कहा, सरकार जब युवा आबादी को रोजगार नहीं देगी, तो यह बोझ बन जाएगी।
नौकरियों की आस में सालों से घर बैठे देश के बेरोज़गार युवा अब भारी आक्रोश में हैं। अनुपम बताते हैं कि ट्विटर पर चले अभियान ने इस बात की पुष्टि कर दी है। 'युवा हल्ला बोल' के तहत #SpeakUpForSSCRailwayStudents हैशटैग भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में नंबर 1 पर ट्रेंड करता रहा। एक दिन में 25 लाख से ज़्यादा ट्वीट भारत के बेरोजगार युवाओं की पीड़ा को बयान कर रहे हैं।
एसएससी और रेलवे में हो रही ढिलाई के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए युवा आगे आ रहे हैं। एक तरफ सरकारी नौकरियों में भर्ती परीक्षा को सरकार खुद गंभीरता से नहीं लेती तो दूसरी ओर करोड़ों छात्रों की उम्मीद व बेहतर भविष्य का सपना इन्हीं भर्तियों पर टिका होता है। एसएससी के द्वारा कराई जा रही सीजीएल 2018 की परीक्षा 850 दिन से और रेलवे की परीक्षा 18 महीने से अटकी पड़ी है।
इन परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ एक सितंबर को मोर्चा खोल दिया है। अनुपम ने कहा कि भर्ती प्रक्रियायों में सालों साल होने वाली देरी से निपटने के लिए 'युवा हल्ला बोल' ने सरकार को 'मॉडल एग्जाम कोड' का प्रस्ताव भी दे रखा है। मॉडल कोड के तहत किसी भी भर्ती में विज्ञापन से लेकर नियुक्ति तक की पूरी प्रक्रिया 9 महीने के अंदर पूरी होने का प्रावधान है।