भारत युवा देश, इसलिए चिंता भी ज्यादा
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की डॉ. सरिता बताती हैं कि भारत एक युवा देश है। इसकी आबादी में युवाओं का योगदान सबसे अधिक है। बाल स्वास्थ्य पर ध्यान देना बहुत जरूरी होगा। अन्यथा देश में साल 2030 या फिर 2040 तक बीमारियों का भार और अधिक बढ़ सकता है। चिकित्सीय अध्ययनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 20 से 25 साल बाद भारत में प्रति परिवार बीमारियों पर सालाना खर्च में 50 से 60 गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है।
ग्रामीण बच्चों पर अधिक ध्यान
आगामी दिनों में देश के विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीबीटी पोषण संबंधी नीतियों को न सिर्फ तैयार करेगा बल्कि जांच और उपचार के साथ इसे प्राथमिक स्तर तक लेकर भी जाएगा ताकि ग्रामीण और कस्बा क्षेत्र के बच्चों पर सबसे अधिक ध्यान दिया जा सके।
जोखिम देखते हुए बनेगी नीति
देश के दो बड़े राष्ट्रीय सर्वेक्षण सीएनएनएस व एनएफएचएस में काफी हद तक स्थिति स्पष्ट हुई है। इसमें कुपोषण, बौनापन और कमजोर बच्चों को लेकर गंभीर परिणाम सामने आए हैं। साथ ही पता चलता है कि बच्चे के शुरुआती जीवन के दो वर्ष में ही रैखिक विकास लड़खड़ाता है। इसके बाद अविकसित या कम वजन वाले बच्चे स्थिर होने लगते हैं। ऐसे में जरूरी है कि नौनिहालों का सभी जोखिम को देखते हुए मूल्यांकन हो। खासतौर पर शुरुआती छह माह के दौरान आहार, बीमारी और इलाज पर ध्यान देना अहम है।