आयुष्मान भारत योजना 2018
आयुष्मान भारत के सूत्रों का कहना है कि तेज पेट दर्द, तेज बुखार, टांके, उत्तकों में चोट, हिस्टेरेक्टोमीज, मनोवस्था संबंधी विकार, मानसिक विकारों, व्यवहार सिंड्रोम, सीजोफ्रेनिया का इलाज केवल सरकारी अस्पतालों में ही किया जाएगा। वहीं गर्भावस्था में ज्यादा जोखिम होने पर या इमरजेंसी वाले मामलों को ही केवल प्राइवेट अस्पतालों में रेफर किया जाएगा।
आयुष्मान भारत योजना से फिलहाल खजाने पर हर साल करीब 5,000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। जो कि अगले साल बढ़कर 10,000 करोड़ हो जाएगा। इस साल 8 करोड़ लोग इससे लाभान्वित हो सकते हैं, वहीं 2020 तक 10 करोड़ लोगों तक पहुंचाने का टारगेट रखा गया है। पहले साल में कुल खर्च में से करीब 3,000 करोड़ केंद्र सरकार देगी। यह कार्यक्रम लाभार्थियों को तत्काल मौके पर कैशलेस और पेपरलेस की सुविधा देगा।
इस योजना के तहत 5 लाख तक के खर्च में, अस्पताल में भर्ती होने के अलावा जरुरी जांच, दवाई, भर्ती से पहले का खर्च और इलाज पूरा होने तक का खर्च भी शामिल है। अगर किसी को पहले से कोई बीमारी है तो उस बीमारी का भी खर्च इस योजना द्वारा उठाया जाएगा।