एसडीजी के 17 लक्ष्यों से जुड़े 85 मापदंडों पर भारत का प्रदर्शन बेहतर हुआ है, जबकि 27 में प्रगति कमजोर पड़ी है। 36 मामलों में प्रगति खराब हुई है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (यूएनईएससीएपी) की ओर से जारी एशिया एंड द पैसिफिक एसडीजी प्रोग्रेस रिपोर्ट 2024 में यह जानकारी दी गई है।
इनमें प्रगति कमजोर
कुपोषण की स्थिति पहले से बदतर हुई, महिलाओं में खून की कमी की समस्या लगभग पहले जितनी
आत्महत्या करने वालों का आंकड़ा बढ़ा, घरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के मामले में भी प्रगति कमजोर पड़ी
पेयजल सुविधाओं में इजाफा
बुनियादी पेयजल सेवाओं का उपयोग करने वाली आबादी में भी इजाफा हुआ है। 2015 में 89.2 फीसदी आबादी तक यह सुविधा उपलब्ध थी, जबकि 2022 में यह 93.3 फीसदी हो गई।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी अच्छी प्रगति
भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। 2015 में देश के 37.9 फीसदी पांच या उससे कम वर्ष के बच्चे अपनी उम्र के लिहाज से ठिगने थे, जबकि 2020 में यह घटकर 35.5 फीसदी रह गई।