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Sandeshkhali: राजनीतिक ताकत और प्रशासन का गठजोड़, आरोप- न्याय मांगों तो देते हैं गांव से निकालने की धमकी

Sun, 18 Feb 2024 06:28 AM IST
जलज मिश्रा एन. अर्जुन, संदेशखाली

सार

बंगाल में संदेशखाली एक छोटा सा द्वीप है, जहां आदिवासी रहते हैं। जनसंख्या 12 हजार के आसपास। यहां दो ब्लॉक हैं। संदेशखाली-1 और संदेशखाली-2। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन दो ब्लॉकों में तृणमूल नेताओं शेख शाहजहां, उत्तम सरदार और शिबू हाजरा ने 10 हजार बीघा से अधिक कृषि भूमि को लीज के नाम पर कब्जा लिया। किसानों की जमीन पर भेड़ी (तालाब) बना लिए और किसानों को मजदूर बनने पर मजबूर कर दिया। बच्चों के खेल का मैदान, स्कूल और मंदिर की जमीन तक को नहीं छोड़ा। गांव के हालात बताती एन. अर्जुन की रिपोर्ट...
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संदेशखली में प्रदर्शन करतीं महिलाएं। - फोटो : एक्स/सोनू ओझा
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विस्तार
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हमारे पूर्वज 100 वर्षों से भी अधिक समय से यहां रह रहे हैं, लेकिन ऐसा अत्याचार और ऐसी घिनौनी राजनीति हमने कभी नहीं देखी। हम आदिवासी हैं। आज अपनी ही जमीन पर मजदूर बन गए। खाने के लाले पड़ गए। क्या हमको कभी न्याया मिलेगा। संदेशखाली नूतन पाड़ा के बुजुर्ग बहादुर आसमान की ओर हाथ जोड़कर फफक पड़ते हैं। कहते हैं, राजनीतिक रसूख, पुलिस और प्रशासन के गठजोड़ ने हमको भीख मांगने पर मजबूर कर दिया। कहीं कोई सुनवाई नहीं है। बहादुर कहते हैं, हमारे ही गांव की करीब 225 बीघा जमीन पर लीज के नाम पर कब्जा कर लिया। जब पैसा मांगों तो लाठी-डंडों से पीटा जाता। न्याय मांगों तो गांव से बाहर निकालने की धमकी मिलती है। किसानों के मुताबिक, शेख शाहजहां ने अकेले पूरे संदेशखाली विधानसभा क्षेत्र में आठ से 10 हजार बीघा जमीन पर अवैद्य कब्जा कर रखा है। अगर उत्तम सरदार और शिबू हाजरा को मिलाकर तीनों की बात करें तो लगभग 12 से 15 हजार बीघा जमीन पर कब्जा किया हुआ है।

जहां जाना है जाओ, क्या कर लोगे

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किसान सुकांत कहते हैं, यहां पर किसान की कोई सुनावाई नहीं। ऊपर से लेकर नीचे तक तृणमूल कांग्रेस का बोलबाला है। सांसद तृणमूल का, विधायक तृणमूल का, ब्लॉक अध्यक्ष तृणमूल का। कृषि योग्य भूमि छीन कर तालाब बना लिए। राजनीतिक ताकत, रसूख का तांडव और घमंड देखिए, कहते जहां जाना हो जाओ।

225 किसान बन गए मजदूर
महिला ने बताया कि पहले हम इन खेतोें पर धान उगाते थे। इन तीनों ने पहले किसानों को जमीन देने का दबाव बनाया। जब आदिवासी किसान नहीं माने तो खेतों में नुना जल (नमकीन पानी) डाल देते। इससे फसल नष्ट हो जाती। इसके बाद जोर-जबरदस्ती से लीज के नाम पर जमीन कब्जा ली। जब (भेड़ी) तालाब बन गए तो उन्होंने किसानों को पैसे नहीं लौटाए। यहां 225 किसान अब मजदूर बन गए हैं।

पुलिस, प्रशासन का मतलब शेख

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किसान हरिपद सरदार कहते हैं, यहां पुलिस या फिर प्रशासन कुछ नहीं सुनते। यहां का सब कुछ है शेख शाहजहां। वह जो बोलेगा वही होगा। जब भी हम पुलिस और प्रशासन के पास जाते, वे हमें शेख शाहजहां, उत्तम सरदार और शिबू हाजरा के पास जाने की सलाह देते।

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