यूक्रेन संकट पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कोलकाता में कहा कि भारत सरकार को सभी छात्रों को तीन महीने पहले ही भारत लेकर आना चाहिए था। तब क्यों नहीं लाया गया, जब सरकार को इसकी जानकारी थी। हर चीज में राजनीतिक बैठक की जाती हैं, लेकिन राजनीति से बढ़कर इंसानियत की लड़ाई होती है।
काशी रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि मैं अखिलेश यादव के लिए प्रचार करने वाराणसी जा रही हूं। मैं विश्वनाथ मंदिर भी जाऊंगी। मैं वहां लोगों का आशीर्वाद भी लूंगी। उन्होंने दार्जीलिंग के बारे में कहा कि मुझे खुशी है कि वहां लोकतंत्र फिर से मजबूत हो रहा है। वहां चुनाव लड़ने वाली पांचों पार्टियों से हमारे अच्छे संबंध हैं। हमारे सामने जल्द ही गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के चुनाव की चुनौती होगी। बंगाल में हुए निकाय चुनाव में मिली भारी जीत से हमारे हौसला और मजबूत हो गया है।
उन्होंने कहा कि मैं सरकार की आलोचना नहीं करना चाहती, खासकर विदेश के मामलों में, क्योंकि हम सभी भारतीय हैं। फिर भी हमें कई बार ऐसे मामलों में भी आवाज उठानी पड़ती है, क्योंकि कई बार राजनीतिक सामंजस्य में कमी और राजीनीति की वजह से हम पीछे रहे जाते हैं और हमारे बच्चे वहां फंस जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की जान जा रही है। कुछ लोग यहां-वहां पनाह लेने के लिए भाग रहे हैं। कुछ लोग बंकर में छिपे हुए हैं, तो कई लोग रोमानिया जैसे देशों में रुके हुए हैं। कुछ लोगों को खाना तक नहीं मिल रहा है। वे खाने की तलाश में निकलते हैं और मारे जाते हैं। जब सरकार को वहां के हालात के बारे में अंदाजा था, तो फिर हमारे छात्रों को जल्दी बाहर क्यों नहीं निकाला गया?
जब ममता से पूछा गया कि आपने पीएम मादी को चिट्ठी लिखकर बिना किसी शर्त के समर्थन देने और सर्वदलीय बैठक की सलाह देने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमारी केंद्र सरकार के कई मंत्री यूपी चुनाव में व्यस्त हैं। इसलिए मैं भी यूपी जा रही हूं, लेकिन इसके बाद मैं अपने सभी दायित्वों का निर्वहन करूंगी।