ब्रिटेन ने चीन के राजदूत झेंग जेगुआंग को ब्रिटिश संसद से प्रतिबंधित कर दिया है। ब्रिटेन का यह कदम चीन के उस कदम के जवाब में आया है, जिसमें उसने शिनजियांग में उइगर अल्पसंख्यकों के खिलाफ किए जा रहे मानवाधिकारों उल्लंघन मामले टिप्पणी के लिए कुछ ब्रिटिश सांसदों पर प्रतिबंध लगा दिए थे।
चीनी दूतावास ने ब्रिटेन के इस कदम की तीखी निंदा की है। बताया गया है कि चीनी राजदूत जेगुआंग को हाल ही में चीन संबंधी सर्वदलीय संसदीय समूह (एपीपीजी द्वारा आयोजित एक बैठक में भाग लेना था। लेकिन संसद के प्रतिबंधित सदस्यों और हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष लिंडसे हॉयल के एक पत्र के बाद इसे रद्द कर दिया गया।
सांसदों ने अपने पत्र में दलील दी कि चीनी सरकार ने अब तक प्रतिबंधों को हटाने का कोई प्रयास नहीं किया है जो लोगों का अपराधीकरण करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी आजादी को सीमित करने का एक औजार है। उन्होंने कहा कि वास्तव में, चीनी सरकार ने प्रतिबंधों को कानूनी बल देने के लिए कदम उठाए हैं।
यह समझा जाता है कि चीनी राजदूत पर प्रतिबंध स्थायी नहीं है। हाउस ऑफ लॉर्ड्स के अध्यक्ष जॉन मैकफॉल ने इस फैसले का समर्थन किया है। लॉर्ड मैकफॉल ने एक बयान में कहा, "दोनों सदनों के अध्यक्ष इस बात से सहमत हैं कि चीन संबंधी सर्वदलीय संसदीय समूह की बैठक लॉर्ड्स के दो सदस्यों सहित विभिन्न सदस्यों के खिलाफ मौजूदा प्रतिबंधों को देखते हुए कहीं और होनी चाहिए।"
संसद से राजदूत को प्रतिबंधित करने के कदम पर टिप्पणी करते हुए चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा, "ब्रिटेन की संसद का निर्णय ब्रिटेन में कुछ लोगों की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। यह एक अदूरदर्शी, लापरवाह और कायरतापूर्ण कदम है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।"
चीन से बढ़ते खतरे के बीच ताइवान ने किया सैन्य अभ्यास
ताइवान ने चीन से बढ़ते खतरे के बीच बुधवार सुबह सैन्य अभ्यास किया, जिसके तहत चार सैन्य विमान जिआदोंग में उतरे। ताइवान ने पांच दिवसीय हान गुआंग सैन्य अभ्यास किया है, ताकि वह चीन के किसी भी हमले के लिए द्वीप के बलों को तैयार कर सके। कोविड-19 के कारण लागू प्रतिबंधों से इस साल यह वार्षिक अभ्यास अपेक्षाकृत छोटा रहा। चीन दावा करता है कि ताइवान उसके क्षेत्र में आता है।