पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, मैंने जो कहा उसमें कुछ भी गलत नहीं था। हम कानूनी रूप से मामले का सामना करेंगे। मैं अपना रुख नहीं बदलूंगा। मैंने केवल अपनी विचारधारा के बारे में बात की है। उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर एक सवाल का जवाब देते हुए अपना रुख दोहराया।
संबंधित याचिका पर अदालत ने कहा था कि यह पुलिस की ओर से कर्तव्य की उपेक्षा है क्योंकि उन्होंने उदयनिधि स्टालिन और हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के मंत्री पी के शेखरबाबू के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, जिन्होंने दो सितंबर को यहां 'सनातन धर्म उन्मूलन' सम्मेलन में भाग लिया था।
उदयनिधि ने डॉ. बी आर अंबेडकर और पेरियार ई वी रामास्वामी का हवाला देते हुए कहा कि सनातन धर्म पर उनकी टिप्पणी ऐसी नहीं थी, जो ऐसे नेताओं ने पहले नहीं कही थी।
उदयनिधि ने नीट के खिलाफ द्रमुक के हस्ताक्षर अभियान के तहत यहां विदुथलाई चिरुथैगल काची के प्रमुख थोल थिरुमावलवन से मुलाकात करने के बाद संवाददाताओं से यह बात कही। थिरुमावलवन ने कहा कि उनकी पार्टी सत्तारूढ़ पार्टी के अभियान का पूरा समर्थन करती है।