राजस्थान में टेलर की निर्मम हत्या के एक दिन बाद केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान सामने आए हैं। बुधवार को मदरसों को लेकर उन्होंने सवाल उठाए और हैरानी जताते हुए कहा कि क्या वहां छोटे बच्चों को पढ़ाया जाता है कि ईशनिंदा की सजा सिर काटना है।
उन्होंने 14 वर्ष की आयु तक प्रत्येक बच्चे को व्यापक शिक्षा का आह्वान करते हुए कहा कि यह उनके मूल अधिकारों में से एक है। उन्होंने कहा कि उस उम्र से पहले उन्हें कोई विशेष शिक्षा नहीं दी जानी चाहिए।
'कुरान से नहीं आता मुस्लिम कानून'
खान ने कहा कि मुस्लिम कानून, कुरान से नहीं आता है। यह 'साम्राज्य' के समय इंसान के द्वारा लिखा गया था जो सिर काटने का प्रावधान करता है। यह कानून बच्चों को मदरसों में पढ़ाया जा रहा है।
जयपुर की घटना पर जब उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा, सवाल यह है कि बच्चों को यह कहां सिखाया जाता है कि ईशनिंदा की सजा सिर काटना है और उन्हें देश में हमारे अपने संस्थानों में ऐसा सिखाया जा रहा है।
खान ने दावा किया, "अब अगर कोई व्यक्ति जिसे पांच या छह साल की उम्र से ही कानून मदरसों में बच्चों को पढ़ाया जाता है। यदि वे (बच्चे) अभ्यस्त हो जाते हैं, उससे प्रभावित होते हैं और उसके अनुसार कार्य करते हैं, तो बेहतर होगा कि 'खतरे' से निपटने का प्रयास किया जाए।"
आसानी से चीजों पर विश्वास करते हैं : खान
राज्यपाल खान ने यह भी कहा कि लोग आसानी से चीजों पर विश्वास कर लेते हैं जब यह विश्वास का विषय बन जाता है तब वे उसके लिए कोई भी अपमानजनक काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
मंगलवार को राजस्थान के उदयपुर में दो लोगों ने एक टेलर की धारदार हथियारों से हत्या कर दी। इस दौरान हमलावरों ने इसका वीडियो भी बनाया और फिर इसे सोशल मीडिया पर यह कहते हुए पोस्ट किया कि उन्होंने इस्लाम के अपमान का बदला लिया है। सोशल मीडिया पर इस क्रूर हत्या की व्यापक निंदा हुई है।
मुख्यमंत्री विजयन ने भी की घटना की कड़ी निंदा
इससे पहले मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन ने भी उदयपुर की घटना की कड़ी निंदा की। हत्या के सिलसिले में रियाज अख्तरी और गौस मोहम्मद के रूप में पहचाने गए दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।