भारतीय राजनीति हमेशा से लोगों के लिए एक दिलचस्प विषय रहा है और इसको प्रभावित करने वाले कारण भी लोगों के लिए चर्चा का विषय रहते हैं। आज हम राजस्थान की राजनीति के एक ऐसे ही पहलू की बात करने वाले हैं।
राजस्थान की राजनीति में क्षेत्रवाद कितना प्रभावी है इस बात की जानकारी इसके राजनीतिक इतिहास से पता चलती है।राजस्थान की राजनीति ने सात दशकों में 13 मुख्यमंत्रियों को देखा है।
उदयपुर, जयपुर और जोधपुर संभाग से तीन-तीन और कोटा, अजमेर और भरतपुर से एक-एक मुख्यमंत्री को सत्ता पर बैठने का मौका मिल चुका है।उदयपुर संभाग राजनीतिक प्रभाव अन्य संभागों से काफी आगे है। मोहनलाल सुखाड़िया जो इसी संभाग से जुड़े थे उन्होंने प्रदेश पर 17 साल शासन किया।
हरिदेव जोशी भी इसी संभाग से संबंध रखते थे और उन्होंने 8 साल तक शासन किया। इस प्रकार उदयपुर संभाग ने 70 सालों में 25 सालों तक सत्ता अपने पास रखने का काम किया है।
लेकिन राजस्थान में राष्ट्रपति शासन का भी एक इतिहास रहा है। स्वतंत्रता के बाद से ऐसे चार मौके आए जब प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। पहली बार 1967, दूसरी बार 1977, तीसरी बार 1980 और अंतिम बार 1992 में यहां राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।