मंत्रालय के अनुसार, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल व परमाणु (सीबीआरएन) केंद्र झज्जर में एम्स परिसर और चेन्नई के स्टेनले मेडिकल कॉलेज में बनाए जाएंगे। इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट एचएलएल इन्फ्रा टेक सर्विसेज ने स्वास्थ्य और रक्षा मंत्रालय व परमाणु ऊर्जा विभाग व भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र जैसे अन्य संस्थानों से सलाह करके बनाई है।
भोपाल गैस त्रासदी या कानपुर अमोनिया गैस लीक जैसे हादसे भविष्य में होने पर पीड़ितों को दो नए उच्च विशेषज्ञता वाले चिकित्सा केंद्रों पर इलाज मिलेगा। झज्जर और चेन्नई में यह केंद्र बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तैयार किया है। यहां रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी और परमाणु दुर्घटना या हमले के पीड़ितों को विशेषज्ञों से इलाज मिलेगा।
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मंत्रालय के अनुसार, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल व परमाणु (सीबीआरएन) केंद्र झज्जर में एम्स परिसर और चेन्नई के स्टेनले मेडिकल कॉलेज में बनाए जाएंगे। इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट एचएलएल इन्फ्रा टेक सर्विसेज ने स्वास्थ्य और रक्षा मंत्रालय व परमाणु ऊर्जा विभाग व भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र जैसे अन्य संस्थानों से सलाह करके बनाई है।
यह केंद्र डेढ़ साल में 230 करोड़ की लागत से बनेंगे। दोनों में 50-50 बेड की सुविधा होगी। इनमें से 16 बेड आईसीयू, 20 आइसोलेशन और 10 बेड प्री व पोस्ट ऑपरेशन रूम के लिए होंगे। 4 बेड बोन-मैरो ट्रांसप्लांट केंद्र के लिए रखे जाएंगे। सभी केंद्रों पर एंबुलेंस सेवा होगी, पीड़ितों को संक्रमण मुक्त करने के लिए गर्म, ठंडे व रासायनिक स्नान की सुविधा मिलेगी।
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यूपी समेत सात जगहों पर उपकेंद्र भी बनेंगे
मंत्रालय के अनुसार सात सीबीआरएन चिकित्सा प्रबंधन केंद्र भी उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु में बनेंगे। एक अधिकारी ने बताया, इन्हें उन परमाणु ऊर्जा संयंत्रों व प्रमुख शहरों के निकट बनाया जाएगा, जो औद्योगिक हादसे या आतंकी हमले की जद में माने जा रहे हैं।