कर्नाटक में पिछले कुछ दिनों से सियासी उथल-पुथल जारी है। कांग्रेस के दो बागी विधायकों रमेश जरकीहोली और महेश कुमार टल्ली का पिछले दो हफ्तों से कोई अता-पता नहीं है। अब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखा है। गुरुवार को लिखे पत्र में उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी वफादारी जताई है क्योंकि उन्हें कांग्रेस विधायक दल की बैठक (सीएलपी) में शामिल न होने के कारण दल-बदल कानून के अंतर्गत नोटिस भेजा गया था।
जरकीहोली, कुमार टल्ली और दो अन्य विधायक बी नागेंद्र और उमेश जाधव कांग्रेस विधायक दल की बैठक से नदारद थे। इस बैठक को कांग्रेस की मजबूती साबित करने के लिए बुलाया गया था क्योंकि ऐसी खबरे थीं कि विधायक पार्टी से इस्तीफा दे सकते हैं। जिससे कि कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर वाली गठबंधन सरकार को अस्थिर किया जा सके। गठबंधन की समन्वय समिति की बैठक के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया जोकि विधायक दल के मुखिया भी हैं, उन्होंने कहा कि राज्य की राजनीतिक परिस्थिति वैसी नहीं है जैसा कि मीडिया दिखा रही है। उन्होंने इस बात को सुनिश्चित किया कि राज्य सरकार पूरी तरह से सुरक्षित है।
सिद्धारमैया ने कहा, 'चार लोग सीएलपी की बैठक में नहीं आए थे। मैंने उन्हें फोन किया और नोटिस जारी किया। जिसमें से तीन ने जवाब दिया है और कहा कि वह पार्टी के प्रति वफादार हैं। उन्होंने कभी किसी भाजपा नेता के साथ मुलाकात नहीं की और न ही वह पार्टी छोड़ने वाले हैं।' हालांकि विधायकों के जवाब को सार्वजनिक नहीं किया गया। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के एक करीबी ने बताया कि जरकीहोली का कहना है कि वह निजी कारणों से व्यस्त थे और इसी वजह से बैठक में शामिल नहीं हो पाए।
जरकीहोली ने अपने जवाब में कहा है कि वह कांग्रेस के साथ लंबे समय से हैं और पांच बार विधायक रह चुके हैं। पत्र में उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा पार्टी के प्रति वफादार रहूंगा और मेरे लिए किसी और पार्टी के साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता है।' कुमार टल्ली ने भी कांग्रेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। उनका कहना है कि वह पार्टी के वफादार कार्यकर्ता रहेंगे। सिद्धारमैया के करीबी के अनुसार बी नागेंद्र ने नोटिस जारी होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है और केवल जाधव ने अभी तक जवाब नहीं दिया है।