फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मणिपुर: कांगपोकपी सीमा पर दो गुटों में भीषण गोलीबारी, दो की मौत; कम तीव्रता वाले विस्फोट की भी खबर

Mon, 20 Nov 2023 05:26 PM IST
अभिषेक दीक्षित अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल
विज्ञापन
Manipur Police - फोटो : Social Media
विज्ञापन

मणिपुर में सोमवार को कांगकोपकी जिले में दो गुटों के बीच हुई भीषण गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई है। घटना के बाद सुरक्षाबलों को सतर्क कर दिया गया है। दूसरी ओर समोवार को ही इसी जिले के मफौ पश्चिम में मफौ कुकी गांव में गोली चलने और कम तीव्रता के विस्फोट की भी खबर है। अभी तक इस मामले में किसी के हताहत की जानकारी नहीं है।

विज्ञापन


सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को सुबह करीब 10.30 बजे इंफाल पश्चिम जिला और कांगपोकपी जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में हरओथेल (कुकी गांव) और कोनसाखुल गांव (नागा गांव) के में कुकी स्वयंसेवकों पर संदिग्ध मैतेई सशस्त्र बदमाशों ने गोलीबारी की। इस घटना में दो कुकी स्वयंसेवकों की गोली लगने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान हेनमिनलेन वैफेई और थांगमिनलुन हैंगिंग दोनों निवासी कांगपोकपी के रूप में हुई है। 

जानकारी के मुताबिक, 167 सीआरपीएफ को हरओथेल में तैनात किया गया है और 18 असम राइफल्स को पीओओ के सामान्य क्षेत्र में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय परिसर में तैनात किया गया है।
विज्ञापन


दूसरी घटना, सोमवार सुबह करीब 5.15 बजे की है। जानकारी के मुताबिकर, सीआई पोस्ट मफौ पश्चिम 29 बीएन बीएसएफजे के एओआर में मफौ कुकी गांव से गोलीबारी की आवाज सुनाई दी। इसके बाद 5.20 बजे इम्फाल पूर्व के परिधीय क्षेत्रों, कांगपोकपी जिले के मफौ कुकी गांव की दिशा में एक कम तीव्रता का विस्फोट (पाइप गन) सुना गया। यह स्थान थाना थौबल के अंतर्गत इंफाल पूर्वी जिला और कांगपोकपी जिले का सामीवर्ती क्षेत्र पड़ता है। इसमें किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

3 मई को भड़की हिंसा में 180 से अधिक लोग मारे गए
अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में जनजातीय एकजुटता मार्च के आयोजन के बाद 3 मई को भड़की हिंसा में 180 से अधिक लोग मारे गए थे। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है। वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं। इसी तरह आदिवासी 40 प्रतिशत हैं, जो मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में रहते हैं। इनमें नागा और कुकी शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें