भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पांचों आरोपियों को ही घर में ही नजरबंद करने का आदेश दिया है। इस मामले की सुनवाई अब छह सितंबर को होनी है। लेकिन अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। पुणे के संयुक्त पुलिस कमिश्नर शिवाजी बोड़ाखे ने बताया कियह पूरी कार्रवाई तुषार दामगुड़े की शिकायत पर कार्रवाई की गई है। बीती 28 तारीख को जिन 5 एक्टिविस्ट को गिरफ्तार किया गया है, उनका तो 8 जनवरी को दर्ज हुई एफआईआर में नाम तक नहीं है। न ही उस एफआईआर में गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) का जिक्र था।
पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के दूसरे दिन इन सभी पर केस दर्ज किया है। पुलिस ने दावा किया था कि सुधा भारद्वाज, अरुण परेरा, वरवर राव, गौतम नवलखा और वरनोन गोन्जाल्विस जनवरी में हुई हिंसा में भीड़ को उकसाने में शामिल थे। पुलिस ने इन पांचों को 11 धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार किया था, लेकिन एफआईआर की कॉपी में सिर्फ 2 धाराओं का जिक्र है।
अब इस मामले में पुणे पुलिस का दावा है कि जुटाए गए सबूतों से ये पता चल रहा है कि कबीर कला मंच और गिरफ्तार किए गए एक्टिविस्टों ने माओवादियों की मदद से फंड और भीड़ जुटाई और सामाजिक भावनाएं भड़काने वाला ये कार्यक्रम कराया। माओवादियों ने इन लोगों की मदद से दलित समुदाय को गुमराह किया और उसी के बाद भीमा-कोरेगांव में हिंसा हुई, जो देखते-देखते पूरे महाराष्ट्र में फैल गई।
8 जनवरी को दर्ज एफआईआर में क्या है?
दामगुड़े की एफआईआर में लिखा है कि दामगुड़े ने फेसबुक पर पुणे में 31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद के कार्यक्रम के बारे में पढ़ा। दामगुड़े इस कार्यक्रम में गया, जहां वह नए नए एक्टिविस्ट बने जिग्नेश मेवाणी, उमर खालिद, रत्न सिंह, प्रशांत डोंथा से मुलाकात की। इस कार्यक्रम में सद्भावना के खिलाफ भावनाएं भड़काने वाले गाने बजाए जा रहे थे। कार्यक्रम में मराठी में एक गाना चलाया जा रहा था। इसका मतलब था- मान्यताओं को किनारे कर दो और नए पेशवाई (सवर्णों) को खत्म कर दो।' उसने छह लोग सुधीर धावले, सागर गोरखे, हर्षिला पोटदार, रमेश, दीपक और ज्योति पर भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया।
वरवर राव ने कहा कि यह सरकार की साजिश
तेलुगु कवि वरवर राव हैदराबाद लाए जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार पर साजिश का आरोप लगाया है। जबकि राव की बेटी ने भी पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने उनसे कहा- आपके पति दलित है, वो कर्मकांड नहीं मानते। पर आपतो ब्राह्मण हैं, फिर आप सिंदूर क्यों नहीं लगाती और गहने क्यों नहीं पहने हुए हैं।
कैसे बदलता गया पूरा मामला
अनीता सावले नाम की महिला ने 2 जनवरी को मराठा नेता संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे को अभियुक्त बनाते हुए एक शिकायत दर्ज कराई थी। 14 मार्च को मिलिंद एकबोटे को गिरफ्तार किया गया। मिलिंद बेल पर बाहर हैं, जबकि संभाजी भिड़े की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।
संभाजी के करीबी तुषार ने दर्ज कराया केस
तुषार दामगुडे ने कई एक्टिविस्ट के खिलाफ 8 जनवरी को शिकायत दर्ज कराई थी। 5 जून को पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया। ये सभी बेल पर बाहर हैं। अब 28 अगस्त को हैदराबाद से वरवर राव, ठाणे से अरुण परेरा, मुंबई से वरनोन, फरीदाबाद से सुधा भारद्धाज और दिल्ली से गौतम को गिरफ्तार किया।