उत्तर प्रदेश की पहली ओलंपियन तीरंदाज सुमंगला को 2004 के एथेंस ओलपिंक में अपने देश के लिए मेडल न जीत पाने की कसक आज भी है। वह 12 साल पहले यूपी से देश के लिए ओलंपिक खेलने एथेंस गई थीं।
यहां प्री क्वार्टर फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को हराया भी लेकिन क्वार्टर फाइनल में भारतीय टीम पदक की दौड़ से बाहर हो गई थी। रियो में तीरंदाजी टीम ठीक उसी मुकाम पर है।
अपने 12 साल पुराने सपने को साकार होता दिखने के लिए सुमंगला चंडीगढ़ में टीवी पर टकटकी ओलंपिक देख रही हैं। उनको उम्मीद है कि भारतीय तीरंदाजी टीममें लक्ष्मी रानी माझी, दीपिका कुमारी, वोमेला देवी और मिश्रित टीम में दीपिका कुमारी और अटानुदास देश के लिए मेडल जीतकर उनके पुराने सपने को साकार करेंगे।
बरेली के फतेहगंज पूर्वी के गांव नेवड़िया में रहने वाले किसान सोमवीर सिंह की पांच संतानों में सबसे बड़ी सुमंगला ने 2001 में तीरंदाजी अमरोहा के चोटीपुरा गुरुकुल में कोच लक्ष्मी प्रिया देवी की देखरेख में सीखना शुरू किया था।
आरथ्री एकेडमी मेरठ में कड़ी मेहनत के बाद यूपी की महिला तीरंदाज के तौर पर सुमंगला को देश की ओर से एथेंस ओलंपिक में खेलना का मौका मिला। इसमें भारत की टीम क्वार्टर फाइनल में पदक की दौड़ से बाहर हो गई थी।
आठ साल पहले तीरंदाजी का अभ्यास छोड़ चुकी ये खिलाड़ी जून 2014 में शादी होने के बाद से चंडीगढ़ में रहती है। सुमंगला की टीम ने 2006 में असम में यूपी की ओर से नेशनल टीम में गोल्ड मेडल जीता।
मगर, उसे मलाल है कि तत्कालीन यूपी सरकार ने नेशनल टीम में यूपी के मेडल जीतने के बावजूद किसी भी खिलाड़ी को न तो कोई पुरस्कार दिया और न ही आर्थिक मदद की।
ओलंपिक के लिए यूपी से खेल प्रतिभाएं न निकलने के सवाल पर सुमंगला का कहना है कि एक तो खिलाड़ियों में जागरूकता की कमी है और दूसरे सरकार ने उनको प्रोत्साहित नहीं किया जबकि हरियाणा और पंजाब सरकार अपने स्टेट में खेल प्रतिभाओं को अच्छा प्रदर्शन करने पर बड़ी आर्थिक मदद देती है।
यही वजह है कि यूपी से खेल प्रतिभाएं नहीं निखर पा रही हैं। सुमंगला के अनुसार अब यूपी सरकार ने सोनभद्र में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की है।
यहां केडी सिंह बाबू स्टेडियम की ओर से तीरंदाजी का प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों के लिए पांच धनुष दिए गए हैं। इससे नए खिलाड़ियों को निश्चित तौर पर आगे आने का मौका मिलेगा।